नई दिल्ली। Arvind Kejriwal ने Swarna Kanta Sharma को संबोधित एक विस्तृत पत्र लिखकर उनके समक्ष लंबित मामले की कार्यवाही से स्वयं को अलग करने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि गांधीवादी सिद्धांत ‘सत्याग्रह’ से प्रेरित होकर वे इस मामले में न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही किसी वकील के माध्यम से आगे भाग लेंगे।

यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब Saurav Das ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टिप्पणी करते हुए इसे एक अभूतपूर्व कदम बताया है। दास ने सवाल उठाया कि क्या यह पहली बार है जब किसी वादी ने सार्वजनिक रूप से किसी न्यायाधीश और उनके न्यायालय का बहिष्कार किया है।

अपने पत्र में केजरीवाल ने कहा कि न्याय का मूल सिद्धांत केवल न्याय किया जाना ही नहीं, बल्कि होता हुआ दिखाई देना भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान परिस्थितियों में इस सिद्धांत का पालन नहीं हो रहा है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई को लेकर उनके मन में गंभीर आशंकाएं उत्पन्न हुई हैं।

पत्र में उन्होंने संभावित “हितों के टकराव” (conflict of interest) का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि न्यायाधीश के परिवार के सदस्य केंद्र सरकार के अधिवक्ता पैनल से जुड़े हैं, जबकि इस मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) विपक्षी पक्ष है और Tushar Mehta उसके वकील हैं। केजरीवाल ने दावा किया कि इससे कार्यवाही की निष्पक्षता पर सार्वजनिक संदेह उत्पन्न होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे इस निर्णय के संभावित कानूनी परिणामों को समझते हैं और उनका सामना करने के लिए तैयार हैं। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम न्यायपालिका के खिलाफ नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों के कारण है।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दे दिया है। केजरीवाल ने अपने पत्र में यह भी संकेत दिया कि वे भविष्य में उन मामलों में भी पेश नहीं होंगे, जिनमें केंद्र सरकार, Bharatiya Janata Party (BJP), Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) या सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता शामिल हों।

पत्र के अंत में उन्होंने संविधान और न्यायपालिका के प्रति अपनी आस्था दोहराते हुए कहा कि उनका उद्देश्य संस्था की गरिमा को बनाए रखना है, न कि उसे चुनौती देना।

क्या है मामला: यह विवाद उस CBI डिस्चार्ज याचिका से जुड़ा है, जिसमें Arvind Kejriwal आरोपी के तौर पर राहत मांग रहे हैं। इस मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) जांच एजेंसी है और अदालत में उसके पक्ष की पैरवी Tushar Mehta कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से न्यायाधीश के समक्ष संभावित हितों के टकराव का मुद्दा उठाते हुए उनके रिक्यूजल (स्वयं को अलग करने) की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद ही केजरीवाल ने कार्यवाही से अलग होने और ‘सत्याग्रह’ का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।

By Jitendra Singh Yadav

जितेंद्र सिंह यादव वरिष्ठ पत्रकार | आरटीआई कार्यकर्ता | राजनीतिक विश्लेषक 20+ वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, UNI से जुड़े। Save Journalism Foundation व इंदौर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के संस्थापक। Indore Varta और NewsO2.com से जुड़े। निष्पक्ष पत्रकारिता व सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित।

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