नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में आगे की सुनवाई का बहिष्कार करने की घोषणा की है। अरविंद केजरीवाल के बाद सिसोदिया ने भी अपनी “अंतरात्मा” और “निष्पक्ष न्याय की सार्वजनिक धारणा” का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में वह इस मामले की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से भाग नहीं लेंगे।

सिसोदिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने विस्तृत पत्र में कहा कि उनका यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में जनता के भरोसे और निष्पक्षता की प्रतीति से जुड़ा है। उन्होंने लिखा कि न्यायपालिका और संविधान पर उनका विश्वास अटूट है, लेकिन जब परिस्थितियां गंभीर हितों के टकराव और पक्षपात की आशंका उत्पन्न करें, तब केवल औपचारिक भागीदारी उनकी अंतरात्मा के विरुद्ध होगी।

उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह किसी व्यक्ति विशेष का प्रश्न नहीं है, बल्कि उस भरोसे का प्रश्न है जिस पर न्याय व्यवस्था खड़ी होती है कि न्याय न केवल निष्पक्ष हो, बल्कि निष्पक्ष दिखाई भी दे।”

सिसोदिया ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि अब उनके पास सत्याग्रह के अलावा कोई सम्मानजनक विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका कदम न्यायपालिका पर हमला नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और सार्वजनिक विश्वास की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण असहमति है।

अपने पत्र में सिसोदिया ने यह भी कहा कि वह न्यायमूर्ति या उनके परिवार के खिलाफ कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां ऐसी हैं जिनमें उनकी अंतरात्मा उन्हें इस पीठ के समक्ष आगे उपस्थित रहने की अनुमति नहीं देती। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उनके पत्र को रिकॉर्ड पर लिया जाए।

इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली आबकारी नीति मामले में न्यायिक निष्पक्षता और राजनीतिक प्रतिरोध को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

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