भोपाल, 27 मई। राजधानी भोपाल के शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय में मेस भुगतान के नाम पर करीब 1.55 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और गबन के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों में विद्यालय के तीन पूर्व प्राचार्य, एक लेखापाल, फर्जी फर्म संचालक और उससे जुड़े अन्य लोग शामिल हैं।
EOW की जांच के अनुसार, मजदूर वर्ग के बच्चों के लिए संचालित श्रमोदय विद्यालयों में भोजन व्यवस्था के लिए “कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड” को ठेका दिया गया था। आरोप है कि वर्ष 2023 में कंपनी में सुपरवाइजर रहे गौरव शर्मा ने कंपनी के नाम से “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर मिलते-जुलते नाम से एक फर्जी फर्म तैयार करवाई और उसका बैंक खाता इंदौर स्थित बैंक में खुलवाया। इसके बाद विद्यालय प्रशासन और लेखापाल की कथित मिलीभगत से भुगतान फर्जी खाते में ट्रांसफर किए गए।
जांच में सामने आया कि विद्यालय की तत्कालीन लेखापाल लीना विश्वकर्मा ने बैंक खाता बदलने के लिए सक्षम अधिकारियों से अनुमति नहीं ली। नोटशीट में मूल कंपनी का नाम दर्ज किया जाता था, लेकिन चेक जारी करते समय “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर भुगतान फर्जी फर्म को किया गया। EOW ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए तत्कालीन प्राचार्यों विजय सिंह महोबिया, संतोष सिंह सिसोदिया और वीरेंद्र दुबे की भूमिका भी संदिग्ध मानी है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में ही फर्जी खाते में पहली राशि ट्रांसफर कर दी गई थी, जबकि बैंक खाता बदलने का आधिकारिक पत्र जून 2024 में विद्यालय को सौंपा गया। फरवरी 2025 में नए प्राचार्य प्रदीप राजावत ने भुगतान प्रक्रिया में गड़बड़ी पकड़ते हुए असली कंपनी को भुगतान कराया था, लेकिन उनके तबादले के बाद कथित तौर पर फिर से फर्जी भुगतान शुरू कर दिए गए।
EOW ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
