इंदौर,28 फरवरी 2025
समाज की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, पहले उद्योगपति, व्यापारी एवं व्यवसायिक घराने अपनी आय का एक हिस्सा सामाजिक कार्यों में लगाकर इसे अपना नैतिक कर्तव्य मानते थे। इसी से बड़े अस्पताल, धर्मशालाएं, स्कूल-कॉलेज आदि का निर्माण होता था। अब सरकार ने इसे कानून के रूप में लागू कर कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत इसे अनिवार्य बना दिया है। सीएसआर कोई दान नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है।
यह विचार समाज कार्य महाविद्यालय की प्लैटिनम जुबली के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विभिन्न वक्ताओं ने व्यक्त किए।
सीएसआर का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना
सेमिनार के मुख्य अतिथि पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी ने कहा कि पहले कॉर्पोरेट का उद्देश्य केवल लाभ कमाना था, लेकिन बाद में श्रम कल्याण कानूनों के लागू होने से उद्योगों को श्रमिकों के हित में कार्य करने की आवश्यकता महसूस हुई। इससे न केवल श्रमिक आंदोलनों में कमी आई, बल्कि औद्योगिक शांति भी बनी रही।
डॉ. कोठारी ने कहा कि सीएसआर का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है, लेकिन कई एनजीओ अपने रिकॉर्ड और संचालन को व्यवस्थित रूप से नहीं संभालने के कारण अधिकतम लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एनजीओ को अपने नाम को एक ब्रांड के रूप में लोकप्रिय बनाना चाहिए, जिससे उन्हें धनराशि आसानी से प्राप्त हो सके।
व्यवसाय और समाज के बीच रिश्ता जरूरी: अनिल मलिक
सेमिनार के मुख्य वक्ता टाटा एक्सपोर्ट्स के एचआर हेड अनिल मलिक ने कहा कि बड़े व्यवसायिक एवं औद्योगिक घराने हमेशा से अपने सामाजिक दायित्व को समझते हुए समाज के विकास में योगदान देते आए हैं। उन्होंने कहा कि कानून समय-समय पर बदलते रहेंगे, लेकिन समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सीएसआर कोई दान नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है। हमें अपनी आय का कुछ हिस्सा समाज को लौटाने पर खर्च करना चाहिए।
वरिष्ठ वक्ताओं का संबोधन और पूर्व विद्यार्थियों का सम्मान
सेमिनार में मध्य प्रदेश वॉलंटरी हेल्थ एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश सिंहा, एडवर्ड मगन जी, मनीषा पायक आदि ने भी विचार रखे। इस अवसर पर समाज कार्य महाविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण सफलता प्राप्त की है। इनमें अनिल मलिक, डॉ. ज्योत्स्ना सवाईकर और आनंद कुमार बैरागी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
सेमिनार का आयोजन और संचालन
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मेथ्यु सी. पी. ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सेमिनार की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन आराधना सहगल और अनामिका दुबे ने किया, जबकि अंत में डॉ. राजेंद्र शर्मा ने आभार व्यक्त किया।
