16 मौतों की पुष्टि पर उठे सवाल
इंदौर।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई जल प्रदूषण त्रासदी को गंभीर जन स्वास्थ्य आपातकाल मानते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। न्यायालय ने इस मामले की स्वतंत्र जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता को एकल जांच आयोग नियुक्त किया है।
यह आदेश WP No.247/2026 सहित अन्य जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान 27 जनवरी 2026 को पारित किया गया। खंडपीठ में विजय कुमार शुक्ला एवं आलोक अवस्थी शामिल थे।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
16 मौतें जलजनित बीमारी से, बाकी पर रिपोर्ट अस्पष्ट
राज्य सरकार द्वारा पेश डेथ ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार 23 मौतों में से 16 मौतें जल प्रदूषण से जुड़ी बताई गई हैं, जबकि अन्य मौतों को “संभावित” बताया गया है।
हालांकि याचिकाकर्ताओं ने इस रिपोर्ट को आधारहीन बताते हुए दावा किया कि मृतकों की संख्या 30 तक है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि रिपोर्ट में प्रयुक्त “वर्बल ऑटोप्सी” की कोई स्पष्ट वैज्ञानिक व्याख्या राज्य पक्ष नहीं दे सका।
जल आपूर्ति, पाइपलाइन और चिकित्सा व्यवस्था पर कड़ी टिप्पणी
न्यायालय ने माना कि:
- सीवेज और जल पाइपलाइन के समानांतर होने से गंदा पानी मिला
- स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की लापरवाही सामने आई
- जमीनी स्तर पर टैंकर, मुफ्त इलाज और जल जांच के निर्देशों का पूर्ण पालन नहीं हुआ
जांच आयोग के अधिकार और कार्यक्षेत्र
एकल जांच आयोग:
- जल प्रदूषण के कारण और स्रोत की जांच करेगा
- वास्तविक मृतकों की संख्या तय करेगा
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा
- पीड़ितों के लिए मुआवजा नीति सुझाएगा
आयोग को सिविल कोर्ट जैसे अधिकार दिए गए हैं, जिसमें अधिकारियों को तलब करना, दस्तावेज मंगाना, लैब जांच और स्थल निरीक्षण शामिल है।
राज्य सरकार और नगर निगम को सख्त निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिए कि:
- रोजाना जल गुणवत्ता जांच की जाए
- प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं
- सुरक्षित पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो
आयोग को चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी।
