कोच्चि, 18 मार्च – केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सिफारिश करते हुए कहा है कि शिक्षकों को स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में छड़ी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि इससे छात्रों के बीच अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

अदालत का तर्क: अनुशासन सुधारने की जरूरत

केरल हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हिकृष्णन ने कहा कि छड़ी का उपयोग करने की नहीं, बल्कि उसके मात्र अस्तित्व की जरूरत है, ताकि यह छात्रों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाल सके और वे अनुशासनहीनता से बचें।

न्यायमूर्ति ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल स्कूलों में अनुशासनहीनता, हिंसा, नशीली दवाओं का सेवन और असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ सख्ती बरतते हैं, तो उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने से पहले उचित जांच की जानी चाहिए।

  • शिक्षकों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि छात्रों के अनुशासन से संबंधित मामलों में शिक्षकों के खिलाफ सीधे पुलिस कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। किसी भी मामले में कार्रवाई करने से पहले पुलिस को प्रारंभिक जांच करना अनिवार्य होगा।

न्यायालय ने कहा कि शिक्षकों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सुरक्षा दी जानी चाहिए और बिना किसी डर के उन्हें अनुशासन बनाए रखने की छूट मिलनी चाहिए।

समाज में चर्चा और मिश्रित प्रतिक्रियाएं

केरल हाई कोर्ट के इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ शिक्षाविदों ने इस सिफारिश का स्वागत किया है, जबकि कुछ अभिभावक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है कि इससे दुर्व्यवहार की संभावना बढ़ सकती है।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि छड़ी का उद्देश्य अनुशासन बनाए रखना है, न कि हिंसा को बढ़ावा देना।

क्या यह फैसला पूरे देश में लागू होगा?

फिलहाल, यह केवल केरल हाई कोर्ट की एक सिफारिश है, लेकिन यदि अन्य राज्यों में भी ऐसी मांग उठती है, तो इसे राष्ट्रीय स्तर पर बहस के लिए लाया जा सकता है।

By Jitendra Singh Yadav

जितेंद्र सिंह यादव वरिष्ठ पत्रकार | आरटीआई कार्यकर्ता | राजनीतिक विश्लेषक 15+ वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, UNI से जुड़े। Save Journalism Foundation व इंदौर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के संस्थापक। Indore Varta और NewsO2.com से जुड़े। निष्पक्ष पत्रकारिता व सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित।