इंदौर/भोपाल, 03 अप्रैल 2024: मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ग्रीष्मकाल के दौरान अधिवक्ताओं को काला कोट पहनने की अनिवार्यता से छूट प्रदान की है। यह छूट 15 अप्रैल 2025 से 15 जुलाई 2025 तक प्रभावी रहेगी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेप्टर IV, पार्ट 6, नियम 4 के तहत यह व्यवस्था की गई है कि ग्रीष्मकाल में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय को छोड़कर अन्य सभी न्यायालयों में अधिवक्ताओं को काला कोट पहनने की अनिवार्यता नहीं होगी।

परिषद को विभिन्न जिला एवं तहसील अधिवक्ता संघों से यह अनुरोध प्राप्त हुआ था कि अत्यधिक गर्मी के कारण अधिवक्ताओं को न्यायालय परिसर में बैठने में कठिनाई होती है। कई बार बिजली बाधित होने से स्थिति और भी विकट हो जाती है। इस संदर्भ में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत ग्रीष्मकाल में अधिवक्ताओं को सफेद शर्ट, काले-सफेद धारीदार या ग्रे पैंट और एडवोकेट बैंड पहनकर अपने अभिभाषकीय दायित्वों का निर्वहन करने की अनुमति दी गई है।

इन्दौर अभिभाषक संघ के “पूर्व-अध्यक्ष” एडवोकेट गोपाल कचोलिया ने बताया कि प्रदेश के कई तहसीलों व जिलों में यह हालात हैं कि बैठने की जगह की तुलना में वकीलों की तादाद काफी ज्यादा है। ऐसे में उन्हें खुले में बैठना पड़ता है या तंग जगह में काम करना पड़ता है। खासकर बिजली गुल हो जाने की दशा में उनकी परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। काउंसिल के इस निर्णय से प्रदेश के एक लाख वकीलों को फायदा पहुंचेंगा।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित दैनिक पीपुल्स समाचार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है। 

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