राज्य सूचना आयोग का कड़ा निर्णय, 975 दिनों तक जानकारी रोकने पर कार्रवाई
मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने नगर निगम इंदौर के सेवानिवृत्त यंत्री सुनील गुप्ता पर ₹25,000 का दंड लगाया है। श्री गुप्ता पर सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 के तहत यह कार्रवाई की गई है, क्योंकि उन्होंने नगर निगम के जल निकासी कार्यों पर खर्च की गई करोड़ों रुपये की जानकारी नहीं दी।
पूर्व पार्षद दिलीप कौशल की अपील पर फैसला
पूर्व पार्षद श्री दिलीप कौशल ने सूचना आयोग में अपील दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि इंदौर नगर निगम ने वर्षा जल निकासी पर हुए खर्च की जानकारी देने में 975 दिनों की देरी की।
- वर्ष 2021 में मात्र 3 इंच बारिश में इंदौर की सड़कें जलमग्न हो गई थीं।
- जल निकासी की विफलता के बावजूद निगम ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए।
- श्री कौशल ने RTI आवेदन देकर इस राशि का हिसाब मांगा, लेकिन निगम ने जानकारी नहीं दी।
- प्रथम अपीलीय अधिकारी श्रीमती भव्या मित्तल ने जानकारी देने का आदेश दिया, जिसे यंत्री सुनील गुप्ता ने नजरअंदाज कर दिया।
RTI नियमों की अनदेखी पर कड़ा एक्शन
राज्य सूचना आयोग ने यह माना कि श्री गुप्ता ने न केवल जानकारी छिपाई बल्कि अपीलीय अधिकारी के आदेशों की भी अवहेलना की।
आयोग ने आदेश दिया कि श्री गुप्ता को ₹25,000 का दंड भरना होगा।
उन्हें 21 अप्रैल 2025 को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया गया है।
नगर निगम इंदौर पर RTI उल्लंघन के गंभीर आरोप
श्री दिलीप कौशल ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी नियमित रूप से RTI कानून का उल्लंघन कर रहे हैं।
30 दिन में सूचना देने का नियम है, लेकिन महीनों तक जवाब नहीं मिलता।
जब जवाब आता है, तो वह अधूरा या भ्रामक होता है।
RTI कानून पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बना है, लेकिन इंदौर नगर निगम पर इसे लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राज्य सूचना आयोग का यह निर्णय भविष्य में प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।