इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100वें स्थापना वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है, और इस ऐतिहासिक अवसर पर संगठन ने अपने भविष्य की योजनाओं को विस्तृत स्तर पर लागू करने की रणनीति बनाई है। विजयादशमी 2025 से शुरू होने वाले शताब्दी वर्ष को संघ आत्मचिंतन, सेवा और समाज के प्रति पुनः समर्पण के रूप में देख रहा है।
26 मार्च 2025 को मालवा प्रांत से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संघ ने संगठन के विस्तार, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के लिए व्यापक योजनाएँ बनाई हैं। इस दौरान पथ-संचलन, घर-घर संपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलन, युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम, पर्यावरण संरक्षण, और सेवा गतिविधियों का विस्तार जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएँगे।
पथ-संचलन और घर-घर संपर्क अभियान से होगा संगठन का विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की शुरुआत विजयादशमी 2025 से होगी। इस अवसर पर पूरे देश में संघ के गणवेश में स्वयंसेवकों का पथ-संचलन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद, नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक तीन सप्ताह का घर-घर संपर्क अभियान चलेगा, जिसमें संघ साहित्य का वितरण किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य RSS के विचारों और सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना और अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ना है।
हिंदू सम्मेलन और सामाजिक सद्भाव पर जोर
शताब्दी वर्ष के तहत सभी मंडलों और बस्तियों में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएँगे, जहाँ समाज में एकता, भाईचारे और राष्ट्र निर्माण में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
इसके अलावा, खंड और नगर स्तर पर सामाजिक सद्भाव बैठकें भी होंगी, जो सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देंगी। इसी क्रम में जिला स्तर पर प्रमुख नागरिक संवाद भी आयोजित किए जाएँगे, जिनमें राष्ट्रीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने और गलत धारणाओं को दूर करने पर जोर दिया जाएगा।
युवाओं और वैश्विक स्तर पर संगठन की पहुँच बढ़ाने की योजना
युवा पीढ़ी को संघ से जोड़ने के लिए प्रांत स्तर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, भाग्यनगर (हैदराबाद) में विश्व संघ शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें 60 देशों के 2,000 स्वयंसेवकों के भाग लेने की संभावना है। यह शिविर संघ के विचारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
सेवा और प्रशिक्षण कार्यों का विस्तार
RSS वर्तमान में 83,129 शाखाएँ और 89,706 सेवा गतिविधियाँ संचालित कर रहा है। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाने के लिए 96 स्थानों पर संघ शिक्षा वर्ग और कार्यकर्ता विकास वर्ग आयोजित किए जाएँगे।
मालवा प्रांत में पिछले वर्ष 403 नई शाखाएँ शुरू हुई थीं और 9,059 कार्यकर्ताओं ने गाँवों में विस्तारक के रूप में कार्य किया था। यह संगठन की ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती पैठ को दर्शाता है।
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता अभियान
RSS सामाजिक सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रहा है। प्रयागराज महाकुंभ में संघ ने “एक थाली-एक थैला अभियान” के तहत 14 लाख से अधिक थैले और प्लेटें वितरित कर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया था।
संघ भविष्य में भी पर्यावरणीय जागरूकता अभियान चलाएगा और विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों जैसे मणिपुर में राहत कार्यों को और विस्तृत करेगा। इसके अलावा, बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर मानवाधिकार मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई जाएगी।
☝️एक संगठित, समरस और सशक्त भारत का लक्ष्य
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति पुनः समर्पण का अवसर है। इस दौरान संगठन का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति और भारत के समरसता पूर्ण विकास की दिशा में कार्य करना रहेगा।
सरकार्यवाह जी ने रानी अबक्का जैसी ऐतिहासिक विभूतियों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया है, जिससे समाज में राष्ट्र प्रेम और सेवा भाव को और अधिक सशक्त किया जा सके।
शताब्दी वर्ष 2025-26 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए संगठनात्मक विस्तार, सेवा कार्यों और वैचारिक नेतृत्व का नया अध्याय होगा।