नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात पुलिस द्वारा कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया। यह मामला इंस्टाग्राम पर साझा की गई उनकी एक कविता से जुड़ा था, जिस पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को संरक्षित करते हुए साहित्य और कला को स्वस्थ समाज और लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताया।

कोर्ट ने क्या कहा?

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि न्यायाधीशों की जिम्मेदारी है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करें, भले ही उन्हें कही गई बात पसंद न आए।

कुणाल कामरा का मामला भी बना राष्ट्रीय बहस

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ महाराष्ट्र में राजद्रोह और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें जांच में शामिल होने के लिए सम्मन भेजा है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण फैसला

इस फैसले के बाद लेखकों, पत्रकारों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को राहत मिल सकती है, जो अभिव्यक्ति की आजादी पर बढ़ती पाबंदियों को लेकर चिंतित थे। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्रता की रक्षा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

क्या यह फैसला भारत में रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को और मजबूती देगा? अपनी राय कमेंट में साझा करें।

By Jitendra Singh Yadav

जितेंद्र सिंह यादव वरिष्ठ पत्रकार | आरटीआई कार्यकर्ता | राजनीतिक विश्लेषक 15+ वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, UNI से जुड़े। Save Journalism Foundation व इंदौर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के संस्थापक। Indore Varta और NewsO2.com से जुड़े। निष्पक्ष पत्रकारिता व सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित।

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