भोपाल गैस पीड़ितों व अन्य अनैतिक क्लीनिकल ट्रायल के मामलों में अब तक कार्रवाई अधूरी
नई दिल्ली/इंदौर/भोपाल/जयपुर, 22 मार्च 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य अधिकार मंच द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अनैतिक क्लीनिकल ट्रायल के मामलों की निगरानी बेहद जरूरी है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल किया जाए। संस्था के अमूल्य निधि ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया।
विज्ञप्ति के अनुसार
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता संजय पारीख ने बताया कि 2005 से 2020 के बीच 6,500 लोगों की मौत क्लीनिकल ट्रायल के दौरान हुई, लेकिन सरकार ने सिर्फ 217 मृतकों को मुआवजा दिया। गंभीर शारीरिक दुष्परिणाम झेल चुके 27,890 मामलों में किसी को भी मुआवजा नहीं मिला।
भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के अनुसार, 2004-2008 के बीच भोपाल गैस पीड़ितों पर हुए क्लीनिकल ट्रायल में 23 मौतें और 22 गंभीर दुष्परिणाम सामने आए। वहीं, इंदौर के एक अस्पताल में 6 डॉक्टरों द्वारा किए गए 76 ट्रायल में 3,307 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें से 1,833 बच्चे थे। 81 लोगों की मौत हो गई, लेकिन दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
एचपीवी वैक्सीन परीक्षण में भी हजारों बच्चों की सहमति बिना परीक्षण हुआ। आंध्र प्रदेश और गुजरात में सहमति फॉर्म में गड़बड़ियां पाई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2025 में होगी।