मुंबई, 29 मार्च 2025 – यह सुबह बाकी दिनों से अलग थी। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही थी। पोस्ट के पीछे का नाम कोई साधारण नहीं था— सुभाष चंद्रा। भारतीय मीडिया जगत के दिग्गज, Zee न्यूज़ के संस्थापक और पूर्व राज्यसभा सांसद। लेकिन आज उनका लहजा कुछ अलग था, जैसे कोई गहरी आत्मस्वीकृति से भरा हुआ हो।

एक पुरानी गलती, जो अब भारी पड़ रही थी

वह जून 2020 की तपती दोपहर थी, जब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की खबर ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। न्यूज़ चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज की बाढ़ आ गई थी, हर कोई जवाब खोज रहा था— क्या यह आत्महत्या थी, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश?

उसी उथल-पुथल के बीच, एक नाम सुर्खियों में आ गया— रिया चक्रवर्ती। उसके हर बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया, हर हरकत को शक की निगाह से देखा गया। Zee न्यूज़ समेत कई बड़े चैनलों ने उसे गुनहगार की तरह पेश किया, बिना किसी ठोस सबूत के।

चार साल बाद, सच सामने आया

वक़्त बीतता गया, लेकिन यह मामला खत्म नहीं हुआ। सीबीआई ने अपनी लंबी जांच के बाद क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट साफ कहती थी— “सुशांत सिंह राजपूत की मौत आत्महत्या थी, और रिया चक्रवर्ती निर्दोष हैं।”

यह रिपोर्ट आते ही मानो बीते वर्षों की गलतियां सुभाष चंद्रा के सामने आ खड़ी हुईं। शायद पहली बार उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और महसूस किया कि उनका चैनल सच की तलाश में नहीं, बल्कि एक ‘मीडिया ट्रायल’ का हिस्सा बन गया था।

एक साहसिक स्वीकारोक्ति

28 मार्च की सुबह, सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट की:

“पीछे मुड़कर देखने पर मुझे एहसास होता है कि मीडिया ने रिया चक्रवर्ती को दोषी बना दिया था। Zee न्यूज़ के पत्रकारों ने इसका नेतृत्व किया, और बाकी मीडिया ने उसे फॉलो किया। Zee न्यूज़ के मेंटर के रूप में मैं उन्हें सलाह देता हूं कि वो बहादुरी दिखाते हुए माफी मांगें। मैं खुद रिया से माफी मांगता हूं, भले ही इसमें मेरी कोई भूमिका न हो।”

क्या मीडिया अब सीखेगा?

यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई।

कुछ लोगों ने इसे बहादुरी कहा, कि एक बड़े मीडिया हस्ती ने अपनी गलती स्वीकार की।

कुछ ने सवाल उठाए, कि क्या Zee न्यूज़ भी आधिकारिक रूप से माफी मांगेगा?

और कुछ लोगों ने यह भी पूछा, “क्या माफी से बीते अन्याय की भरपाई हो सकती है?”

लेकिन असली सवाल यह है— क्या बाकी मीडिया हाउस भी अपनी गलती मानेंगे? क्या वे भी उतनी ही साहसिकता दिखाएंगे, जितनी उन्होंने रिपोर्टिंग के दौरान दिखाई थी?

यह सवाल पाठकों पर छोड़ते हैं।

By Jitendra Singh Yadav

जितेंद्र सिंह यादव वरिष्ठ पत्रकार | आरटीआई कार्यकर्ता | राजनीतिक विश्लेषक 15+ वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, UNI से जुड़े। Save Journalism Foundation व इंदौर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के संस्थापक। Indore Varta और NewsO2.com से जुड़े। निष्पक्ष पत्रकारिता व सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित।

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