इंदौर, 27 फरवरी (न्यूज़O2)।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के तहत सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को प्रदान की गई विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई गुरुवार को हुई, जबकि आदेश शुक्रवार को न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने यह आदेश पारित किया।
याचिका में क्या चुनौती
याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता सौरभ त्रिपाठी, जो स्वयं पक्षकार के रूप में उपस्थित हुए, ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर कर 9 दिसंबर 2021 की उस अधिसूचना की वैधता को चुनौती दी है, जिसके माध्यम से दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत ACP को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की गई थीं।
राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता कुशल गोयल ने अग्रिम सूचना पर न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराई।
BNSS-2023 का दिया गया हवाला
याची की ओर से जानकारी देने वाले अधिवक्ता मयंक शर्मा के अनुसार याचिका में कहा गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 लागू होने के बाद विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति केवल ऐसे पुलिस अधिकारी को की जा सकती है, जिसकी रैंक पुलिस अधीक्षक (SP) या समकक्ष अथवा उससे ऊपर हो।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि ACP पद DSP रैंक का होता है, जो SP से नीचे है, इसलिए वर्तमान व्यवस्था BNSS की धारा 15 के विपरीत है।
कोर्ट का आदेश
प्रारंभिक सुनवाई के बाद खंडपीठ ने मामले में उठाए गए प्रश्नों को विचारणीय मानते हुए प्रतिवादियों को प्रक्रिया शुल्क जमा कर सात कार्य दिवस के भीतर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस की वापसी अवधि चार सप्ताह निर्धारित की गई है।
अदालत ने फिलहाल अधिसूचना या ACP की शक्तियों पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है।
याचिका में उठाए गए अन्य मुद्दे
याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में पुलिस अधिकारी द्वारा ही कार्रवाई शुरू करने और उसी स्तर पर मजिस्ट्रियल आदेश पारित किए जाने से शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर प्रश्न खड़े होते हैं। आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए बड़ी संख्या में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के मामलों का उल्लेख भी किया गया है।
आगे की कार्यवाही
मामले को नोटिस अवधि पूर्ण होने के बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। याचिका के परिणाम का प्रभाव पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में ACP स्तर के अधिकारियों को दी गई मजिस्ट्रियल शक्तियों पर पड़ सकता है।
