इंदौर/कटनी
मध्यप्रदेश के कटनी जिले स्थित करोंदी गांव, जिसे देश का भौगोलिक केंद्र बिंदु माना जाता है, में इंदौर के वास्तु विशेषज्ञ डॉ. अवनीश जैन के नेतृत्व में तीन दिवसीय वास्तु एवं ऊर्जा अध्ययन संपन्न हुआ। भारतीय वास्तु महासंघ और फाइव स्टार वास्तु ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शोध में देशभर से आए विशेषज्ञों ने भाग लिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, करोंदी कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण वास्तु दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे ‘राष्ट्र का ब्रह्मस्थान’ माना गया। अध्ययन के दौरान स्थल की ऊर्जा संरचना और भू-चुंबकीय प्रभावों का परीक्षण अत्याधुनिक उपकरणों—जिओपैथिक स्ट्रेस फाइंडर, ओरा स्कैनर, क्वांटम एनर्जी स्कैनर और एल-रॉड्स—की सहायता से किया गया।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत शंकुस्थापन और वास्तु पदमंडल अनुष्ठान भी आयोजित किया गया। गया के विद्वान पंडित उपेंद्र कुमार द्वारा विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराया गया, जिसमें 45 देवताओं का आह्वान किया गया। आयोजकों का दावा है कि अनुष्ठान के पश्चात ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
इस दौरान ‘वास्तु चालीसा’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसमें वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों को सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अध्ययन दल में ईं. आचार्य अखिलेश जैन, रमणलाल पटेल, अनिल झांब, डॉ. शालिनी गुगनानी, शिवरामदास और डॉ. रवि सिंघवी सहित कुल 16 विशेषज्ञ शामिल रहे। तीन दिनों के अध्ययन और विश्लेषण के बाद टीम ने स्थल की ऊर्जा संरचना को संतुलित बताते हुए कुछ सुधारात्मक सुझाव भी दिए हैं।
डॉ. अवनीश जैन ने बताया कि इस शोध की विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र ही संबंधित विभागों और प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी जाएगी, जिसमें ऊर्जा संवर्धन, संरक्षण और विकास से जुड़े सुझाव शामिल होंगे।
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अध्ययन से भारतीय वास्तु परंपरा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।
