हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल से रोज सुनवाई तय की, वीडियोग्राफी आपत्तियों पर भी होगा विचार
इंदौर, 2 अप्रैल: धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद और स्थल पर जैन समाज के दावे से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सभी संबंधित याचिकाओं की नियमित सुनवाई 6 अप्रैल 2026 से शुरू करने का निर्णय लिया है। सुनवाई प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से होगी।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मामले में दायर सभी याचिकाओं और अपीलों को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए वीडियोग्राफी से जुड़ी आपत्तियों का मुद्दा उठाया। अदालत ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई वीडियोग्राफी से संबंधित आपत्तियों पर भी अन्य आपत्तियों के साथ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान विभिन्न पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की। हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद उपस्थित रहे। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन ने पक्ष रखा।
याचिकाकर्ता पक्ष से जुड़े सलेक चंद जैन के अनुसार, उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर ने पैरवी की, जबकि अधिवक्ता प्रिया जैन भी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहीं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन सहित अन्य वकीलों ने पीआईएल के जवाब और लिखित आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सरकार को शॉर्ट एफिडेविट दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी 2026 के आदेश और पूर्व में 11 मार्च 2024 को पारित आदेश का भी संदर्भ लिया है। अदालत ने कहा कि सभी पक्षों की आपत्तियों—विशेष रूप से वीडियोग्राफी से संबंधित—पर सुनवाई कर उचित निर्णय लिया जाएगा।
अब मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को दोपहर 2:30 बजे होगी। उसी दिन याचिकाकर्ता पक्ष द्वारा अपने प्रकरण का पुनः उल्लेख (मेंशन) भी किए जाने की संभावना जताई गई है। इस नियमित सुनवाई को विवाद के निर्णायक चरण के रूप में देखा जा रहा है।
