भागीरथपुरा दूषित जल त्रासदी: हाई कोर्ट में आज जो कुछ हुआ

हाईकोर्ट में कड़ी सुनवाई, सरकार से जवाबों पर उठे सवाल

इंदौर, 20 जनवरी 2026 : मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में आज इंदौर हाईकोर्ट में युगल पीठ के समक्ष अहम सुनवाई हुई। लगभग सवा घंटे चली इस सुनवाई में राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए।

सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा याचिकाकर्ताओं को “अपोजीशन” कहे जाने पर कोर्ट ने आपत्ति जताई। इस पर सीएस अनुराग जैन ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए शब्दों में सुधार किया।

एफआईआर और जिम्मेदारी पर तीखी बहस

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं की ओर से बार-बार दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने कहा कि दोषी तय करने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि कोर्ट के निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं और क्षेत्र में साफ पानी कब तक मिलेगा। याची के अधिवक्ता रितेश इनानी ने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि जब तक जांच कमेटी बनेगी और जांच शुरू होगी, तब तक सभी अहम सबूत नष्ट कर दिए जाएंगे।

जांच समिति पर याचिकाकर्ताओं की आपत्ति

इस मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित जांच समिति को याचिकाकर्ताओं ने मानने से इंकार कर दिया। अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि घटना को 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार ने व्यावहारिक रूप से कुछ भी नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो अधिकारी जिम्मेदार थे, उन्हें हटाने के बजाय पदोन्नति दे दी गई। नगर निगम से हटाकर पर्यटन विभाग में बड़ी पोस्ट दी गई, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। बागड़िया ने कहा कि यह मामला गैर इरादतन हत्या का है और इतने समय बाद भी प्रशासन दूषित पानी के स्रोत का पता नहीं लगा सका।

अधिवक्ता बागड़िया ने आगे उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि उपहार सिनेमा अग्निकांड में भी एफआईआर दर्ज हुई थी और ताजा मामला देखें तो कर्नाटक के बेंगलुरु के स्टेडियम में आरसीबी की फेलिसीटेशन सेरेमनी में मची भगदड़ में सीएम के आदेश पर वहाँ आयोजकों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के मामले दर्ज हुए और आयोजकों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए गए, लेकिन भागीरथपुरा मामले में न तो विभागीय जांच हुई और न ही अब तक कोई एक भी जांच रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश की गई। यह भी बताया गया कि नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर के 7–8 दिन बाद भी दूषित पानी से 15 और मौतें हुईं।

कोर्ट ने माना कि “कहीं न कहीं गंभीर गड़बड़ी हुई है। इसलिए इतनी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं लेकिन कई बार एफआईआर की अपील के बावजूद कोर्ट ने रुचि नहीं दिखाई।

नगर निगम का दावा और कोर्ट का सवाल

कोर्ट ने पूछा कि दूषित पानी का सोर्स क्या है जिस पर नगर निगम की ओर से कहा गया कि एक सार्वजनिक शौचालय से पानी दूषित हुआ था, जिसे तोड़ दिया गया है। जबकि हकीकत में प्रशासन ने भागीरथपुरा पुलिस चौकी के शौचालय को मुख्य सोर्स बताते हुए तोड़ा है ।

इस पर जज ने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ शौचालय के पानी से इतनी बड़ी संख्या में मौतें हो सकती हैं।

अधिवक्ता अजय बागड़िया ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि खान नदी में लगातार दूषित पानी मिल रहा है और वह दूषित सप्लाई वाटर में मिल रहा है । उन्होंने प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भागीरथपुरा भी खान नदी पर बसा है जिसमें फीकल कंटेमिनेशन पाया गया है और यह प्रदेश की सबसे दूषित नदी है, जिसे साफ करने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, फिर भी हालात नहीं सुधरे।

स्वतंत्र जांच समिति की मांग

याचिकाकर्ताओं ने सर्वसम्मति से जस्टिस शांतनु केमकर के नेतृत्व में एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की। जिस पर कोर्ट ने याची अधिवक्ताओं से 3 नाम मांगे हैं।

साफ पानी को लेकर सरकार से जवाब

कोर्ट ने राज्य शासन से कहा कि सरकार भले ही निर्देशों के पालन का दावा कर रही हो, लेकिन अब भी शिकायतें मिल रही हैं कि लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जनता दूषित पानी की शिकायत आखिर कहां करे।

इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन और हर सप्ताह होने वाली जल सुनवाई में शिकायत की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि तीन स्तरों पर मॉनिटरिंग की जा रही है—जिला कलेक्टर, संभागायुक्त और अपर मुख्य सचिव नियमित निगरानी कर रहे हैं।

सुनवाई के दौरान उक्त दलीलें सामने आईं है, हालांकि कोर्ट ने मामले में खबर लिखे जाने तक कोई आदेश जारी नहीं किया है।

सुनवाई के दौरान पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही, जवाबदेही और पीड़ितों को न्याय मिलने के सवाल केंद्र में रहे।

आपको बता दें कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 23 से अधिक मौतें हो चुकी है, जिस पर शासन ने समिति तैयार कर एक माह में रिपोर्ट तलब की है, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने मामले में कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। कोर्ट ने आज किसी तीन लोगों के नाम चाहे है, जिस पर जांच समिति बनाई जा सके।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।