प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के पूर्व कर्मचारी चेतन पाटिल के मामले में करीब 39.91 लाख रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
ईडी के अनुसार यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। जब्त की गई संपत्तियों में प्लॉट और आवासीय भवन शामिल हैं, जो चेतन पाटिल और उनकी पत्नी ज्योति पाटिल के नाम पर दर्ज हैं।
ईओडब्ल्यू की एफआईआर के आधार पर जांच
ईडी ने बताया कि जांच की शुरुआत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), इंदौर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जो PMLA के अंतर्गत अनुसूचित अपराध माने जाते हैं।
Enforcement Directorate Indore has provisionally attached properties worth Rs 39.91 lakh of former IMC employee Chetan Patil under PMLA in a disproportionate assets case.
1.38 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का आरोप
प्रेस रिलीज के मुताबिक, चेतन पाटिल पर आरोप है कि उन्होंने करीब 1.38 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्ति अर्जित की, जो उनकी ज्ञात आय से कहीं अधिक थी। जांच एजेंसी के अनुसार, उनकी वैध आय लगभग 55.11 लाख रुपये बताई गई है।
फर्जी फर्म और बैंक खातों के जरिए धनशोधन का शक
ईडी का दावा है कि अपराध से अर्जित धन को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। जांच में एक प्रोप्राइटरशिप फर्म एम/एस नागरोध आर्किटेक्ट इंजीनियर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर का भी उल्लेख किया गया है, जो कथित तौर पर चेतन पाटिल की पत्नी के नाम पर थी और जिसका कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि नहीं पाई गई।
एजेंसी के अनुसार इस फर्म का इस्तेमाल नकद जमा और धन की परतें बनाने (लेयरिंग) के लिए किया गया।
संपत्ति का बाजार मूल्य 80 लाख से अधिक
ईडी ने कहा है कि जिन संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है, उनका वर्तमान बाजार मूल्य 80 लाख रुपये से अधिक है। ईडी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।
