स्टे के दौरान ही जारी हुआ था सरकारी निरस्ती का आदेश
इंदौर। शहर के बड़वाली चौकी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद की लीज वाली जमीन का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने राज्य सरकार द्वारा जामा मस्जिद की भूमि की लीज निरस्त करने के आदेश पर रोक (स्टे) लगा दी है। न्यायमूर्ति जस्टिस प्रणय वर्मा ने मस्जिद पक्ष के तर्कों से सहमति जताते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।
मस्जिद पक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
जामा मस्जिद की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सैयद अशहर अली वारसी ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि यह पूरा मामला जामा मस्जिद की जमीन के स्वामित्व और उसके उपयोग से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में न्यायालय ने सरकार के उस कदम पर पहले ही स्टे दिया था, जिसमें मस्जिद की भूमि को पुलिस विभाग को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, उसी स्टे आदेश के प्रभावी रहने के दौरान सरकार ने एक नया आदेश पारित कर मस्जिद की लीज ही निरस्त कर दी।
अवैध प्रक्रिया पर कोर्ट की रोक
हाई कोर्ट में अधिवक्ता वारसी ने तर्क दिया कि जब मामला न्यायालय के विचाराधीन है और भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगी हुई है, तब सरकार द्वारा लीज निरस्ती का आदेश पारित करना न केवल अवैध है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध भी है। उच्च न्यायालय ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सरकार के लीज निरस्ती आदेश के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
इस आदेश के बाद मस्जिद प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है। अब मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। कोर्ट ने प्रकरण को अगले सप्ताह पुनः सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
