अभ्यास मंडल की व्याख्यानमाला में बोले राज्यसभा सांसद, भाषा और लोकतंत्र पर जताई चिंता

इंदौर, 17 मई 2026 : चिंतक, विचारक, राज्यसभा सांसद प्रोफेसर Manoj Kumar Jha रविवार को इंदौर पहुंचे, जहां उन्होंने अभ्यास मंडल की 66वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में हिस्सा लिया। “राजनीति की भाषा, भाषा की राजनीति ” विषय पर अपने व्याख्यान में उन्होंने बिना किसी राजनीतिक दल या नेता का प्रत्यक्ष नाम लिए वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक हालात पर टिप्पणी करते हुए चिंता की।

झा ने अपने संबोधन में भूतपूर्व पीएम स्व इन्दिरा गांधी के समय लगे आपातकाल और वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 50 साल पहले भी यह कहा गया था कि “इंडिया इज़ मी (इन्दिरा) और मी इज़ इंडिया”, और आज भी वैसी ही परिस्थितियां दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि देश और सत्ता को एक समान मान लेना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होने कहा कि देश के पर्यायवाची मुल्क और वतन हो सकते हैं, लेकिन सत्ता को ही देश मान लेना , ऐसा नहीं हो सकता।

इस दौरान उन्होने देश के सर्वोच्च न्यायधीश के कॉकरोच और परजीवी टिप्पणी पर आए स्पष्टीकरण को भी संदर्भित किया।

राजनीति और सार्वजनिक विमर्श में भाषा के लगातार गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए झा ने कहा कि पहले यदि कोई व्यक्ति अभद्र भाषा का प्रयोग करता था तो उसके अपने लोग भी उससे दूरी बना लेते थे, लेकिन अब आक्रामकता को स्वीकार्यता मिल रही है। उन्होंने कहा कि आज राजनीतिक और टीवी बहसों में भाषा का स्तर लगातार गिर रहा है। इसलिए बीप बीप बजाना पड़ता है। सदन में गिरते भाषा के स्तर का जिक्र करते हुए उन्होने इंदौर की सांसद और पूर्व लोक सभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को याद किया । झा ने कहा कि यदि आज श्रीमती महाजन स्पीकर होतीं तो वह तुरंत हस्तक्षेप कर भाषा की मर्यादा बनाए रखती थीं।

उन्होंने कहा कि राजनीति में भाषा इतनी गिर चुकी है कि यदि आज के समय में Mahatma Gandhi होते और चुनाव लड़ते, तो वे चुनाव हार जाते और उनकी जमानत तक जब्त हो जाती या इन हालातों में तो समझदार चुनाव लड़ता ही नहीं । उन्होंने कहा कि समाज। प्रतिनिधि चुनता है, पहलवान नहीं।

महाराष्ट्र में भाषा विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक बिहारी ऑटो चालक भी इतना मराठी सीख लेता है कि वह अपने ग्राहकों से संवाद कर सके। भाषा संवाद का माध्यम होनी चाहिए, विवाद का नहीं।

उन्होंने कहा कि आज सरकार की आलोचना को देश की आलोचना के रूप में देखा जाने लगा है। उन्होंने “अर्बन नक्सल” और “घुसपैठिए” जैसे शब्दों के बढ़ते उपयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति की नजर किसी जमीन पर पड़ जाए तो विरोध करने वाला व्यक्ति भी ऐसे विशेषणों से चिह्नित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में स्वागत श्याम सुंदर यादव, रामबाबू अग्रवाल, अन्ना दुराई, नेहा जैन (न्यूज ओ 2 की प्रतिनिधि ) , इशाक चौधरी और अंजेश ने किया। संचालन मनीष भालेराव ने किया। स्मृति चिन्ह अनिल त्रिवेदी और ओपी गोयल ने भेंट किए, जबकि आभार प्रदर्शन अरविंद तिवारी ने किया।

अभ्यास मंडल की व्याख्यानमाला के अंतर्गत सोमवार को मध्य प्रदेश भाजपा प्रभारी Mahendra Singh का “भारत दृष्टि 2047” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया जाएगा।

आपको बता दें १६ मई से अभ्यास मण्डल की ग्रीस्म्कालीन व्याख्यानमाला शुरू हो चुकी है जिसके उद्घटन सत्र में कुलगुरु राकेश सिंघई ने ‘ नया भारत, नई सोच ‘ पर अपना व्याकहायन दिया। और सत्र का शुभारंभ अभ्यास मण्डल के संस्थापकों में से एक श्री अशोक चितले ने किया ।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है। 

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