कॉकरोच परजीवी टिप्पणी पर देशभर में बवाल, युवाओं, नेताओं, पत्रकारों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने जताई आपत्ति

इंदौर, 16 मई 2026 : सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर उनके कथित “कॉकरोच” और “परजीवी” संबंधी बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर “कॉकरोच” शब्द ट्रेंड करने लगा और बड़ी संख्या में वकील, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता तथा राजनीतिक हस्तियों ने इस टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं।

मामला उस समय चर्चा में आया जब एक सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कथित रूप से कहा कि कुछ युवा ऐसे हैं जिन्हें रोजगार नहीं मिलता और पेशे में भी उनके लिए जगह नहीं होती, जिसके बाद वे मीडिया, सोशल मीडिया, आरटीआई या अन्य एक्टिविज्म से जुड़कर दूसरों पर हमला करना शुरू कर देते हैं। इस टिप्पणी को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने सीजेआई को एक खुला पत्र लिखते हुए इस भाषा पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसे शब्द लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। पत्र में उन्होंने बेरोजगार युवाओं, आरटीआई कार्यकर्ताओं और स्वतंत्र पत्रकारों को लोकतंत्र की महत्वपूर्ण आवाज बताया। https://x.com/manojkjhadu/status/2055274175523434742

वहीं एक वरिष्ठ पत्रकार दिबांग ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि देश को सबसे अधिक नुकसान युवाओं ने नहीं बल्कि व्यवस्था की कमजोरियों, भ्रष्टाचार और संस्थागत विफलताओं ने पहुंचाया है। उन्होंने न्यायपालिका और मीडिया की स्थिति पर भी सवाल उठाए और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा की आवश्यकता बताई। https://x.com/dibang/status/2055360943312495052

वरिष्ठ पत्रकार Rajdeep Sardesai ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि जो युवा और आरटीआई कार्यकर्ता कठिन सवाल पूछते हैं और व्यवस्था की कमियों को सामने लाते हैं, क्या उन्हें “कॉकरोच” कहा जाएगा? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था अब इस स्तर तक पहुंच गई है।

इसी तरह वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने भी बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति के व्यवहार के आधार पर व्यापक टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान से गलत संदेश जाता है और स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। https://x.com/pbhushan1

आप नेता सौरभ भारद्वाज X पर लिखते हैं, “आरटीआई कार्यकर्ता और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग लोकतंत्र को सुचारू रूप से चलाने वाले सुरक्षा वाल्व की तरह हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा उनकी तुलना परजीवियों और कॉकरोच से करना निंदनीय है।” https://x.com/Saurabh_MLAgk/status/2055459401344106515

क्या है पूरा मामला?

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह मामला दिल्ली के अधिवक्ता संजय दुबे की याचिका से जुड़ा है। उनका कहना है कि वर्ष 2014 में वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई थीं। उनके अनुसार चयन प्रक्रिया में पक्षपात हुआ और कुछ कम योग्य लोगों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया गया, जबकि योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी की गई।

संजय दुबे ने कहा कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी और उनका उद्देश्य चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित करना था।

फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर न्यायपालिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विमर्श पर व्यापक बहस का विषय बन गया है।

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