मप्र के 5 शहरों में मूक बधिरों के लिए मीडियेशन सेंटर शुरू

इंदौर/जबलपुर, 16 मई 2026

 मूक-बधिर समुदाय को न्यायिक प्रक्रिया से सीधे जोड़ने और उन्हें सुलभ कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ‘संकेत संवाद मध्यस्थता केन्द्र’ का शनिवार को ई-लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का वर्चुअल शुभारंभ भारत के मुख्य न्यायाधिपति सूर्यकांत द्वारा जबलपुर से किया गया।

देश में पहली बार इस प्रकार की पहल के अंतर्गत मध्यप्रदेश के पांच शहरों में विशेष मीडियेशन सेंटर शुरू किए गए हैं। इन केंद्रों का संचालन मूक-बधिरों की 28 सदस्यीय विशेष प्रशिक्षित टीम करेगी।

 यह केंद्र इंदौर के तुकोगंज, भोपाल महिला थाना, जबलपुर के लॉर्डगंज थाना, रीवा के बिछिया थाना और सीधी कोतवाली में एक साथ शुरू किए गए हैं।

जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav, केंद्रीय कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal, सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश और मप्र हाई कोर्ट के न्यायधीश शामिल  हुए।

इंदौर के तुकोगंज पुलिस थाने में आयोजित कार्यक्रम में 

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण DLSA के सचिव शिवराज सिंह गवली ने बताया कि इस 28 सदस्यीय विशेष टीम को नई दिल्ली में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे कानूनी सेवाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं में प्रभावी सहायता प्रदान कर सकेंगे।

इस अवसर पर ‘संकेत वाणी’ ऐप का भी लोकार्पण किया गया। 

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि संभवतः यह दुनिया का पहला ऐसा प्लेटफॉर्म है जो साइन लैंग्वेज आधारित तकनीक के माध्यम से न्यायिक सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से होना एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल न्याय व्यवस्था के जरिए गति, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है। रियल-टाइम सहायता से न्यायिक प्रक्रिया में आने वाली देरी कम होगी और “ईज़ ऑफ जस्टिस” की अवधारणा मजबूत होगी।

 उन्होंने कहा कि कई बार प्रक्रिया में विलंब के कारण व्यक्ति सजा पूरी होने के बाद भी जेल में रह जाता है, लेकिन तकनीक आधारित व्यवस्था से ऐसी समस्याओं में कमी लाई जा सकेगी।

कार्यक्रम में मौजूद न्यायाधीशों ने भी न्याय व्यवस्था में तकनीक के महत्व पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि न्याय केवल फाइलों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।

मूक-बधिर विशेषज्ञ ज्ञानेंद्र पुरोहित ने कहा कि मूक-बधिर हेल्पलाइन पहले से काम कर रही थी, लेकिन कई मामले न्यायालयों तक पहुंचते हैं। ऐसे में मीडियेशन सेंटर विवादों के त्वरित समाधान में मददगार साबित होंगे। उन्होंने बताया कि उनके पास मध्यप्रदेश के अलावा दिल्ली और अन्य राज्यों से भी कानूनी मामलों से जुड़े प्रकरण आ रहे हैं, जिनके समाधान का कार्य किया जा रहा है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *