कुटुंब न्यायालय ने खारिज कर दी थी आपसी सहमति से जैन दंपत्ति की तलाक याचिका
फेमिली कोर्ट का फैसला असंवैधानिक और गैर कानूनी – हाई कोर्ट
इंदौर, 24 मार्च 2025 – मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जैन समुदाय के लोगों पर भी हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 लागू होगा। यह फैसला नितेश सेठी बनाम शिखा सेठी मामले में आया, जहां 13 बी के तहत आपसी सहमति से विवाह विच्छेद याचिका को परिवार न्यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि जैन समुदाय पर यह कानून लागू नहीं होता।
क्या है मामला?
- नितेश सेठी और शिखा सेठी की शादी 17 जुलाई 2017 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी।
- 18 अप्रैल 2018 को पारिवारिक विवाद के कारण शिखा अपने मायके चली गई और दोनों पिछले 6 वर्षों से अलग रह रहे थे।
- 6 जुलाई 2024 को दोनों ने आपसी सहमति से तलाक के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13बी के तहत इंदौर परिवार न्यायालय में याचिका दायर की।
- 8 फरवरी 2025 को परिवार न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि चूंकि जैन समुदाय को 2014 को आ अल्पसंख्यक का दर्जा मिला है लिहाजा जैन समुदाय पर हिंदू विवाह अधिनियम लागू नहीं होता।
परिवार न्यायालय ने क्यों खारिज की याचिका?
परिवार न्यायालय ने 27 जनवरी 2014 को केंद्र सरकार की उस अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें जैन समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय घोषित किया गया था।
न्यायालय ने कहा कि जैन धर्म और हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों में अंतर है, इसलिए जैन समुदाय पर यह अधिनियम लागू नहीं होता।
इस फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की। शिखा सेठी की तरफ से अधिवक्ता वर्षा गुप्ता और याची नितेश सेठी की तरफ से अधिवक्ता पंकज खंडेलवाल ने पैरवी की।
इंदौर हाईकोर्ट का फैसला
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुष्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति संजय एस. कालगांवकर की खंडपीठ ने परिवार न्यायालय के फैसले को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार देते हुए इसे रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा जैन हिन्दू नहीं हैं लेकिन वे हिन्दू विवाह अधिनियम के दायरे में आते हैं।
अदालत ने कहा:
- हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 जैन समुदाय पर भी लागू होता है।
- केंद्र सरकार की अधिसूचना केवल जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देती है, लेकिन इससे वे हिंदू विवाह अधिनियम के दायरे से बाहर नहीं होते।
- परिवार न्यायालय को ऐसे मामलों में खुद से निर्णय लेने का अधिकार नहीं था और उसे उच्च न्यायालय से मार्गदर्शन लेना चाहिए था।
क्या होगा अब?
- उच्च न्यायालय ने परिवार न्यायालय, इंदौर को निर्देश दिया कि वह तलाक की याचिका पर आगे की कार्यवाही करे।
- इस फैसले से जैन समुदाय के लोगों को राहत मिली है और अब वे भी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।