भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की ₹92 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में की गई है। जांच में सामने आया कि सौरभ शर्मा ने सरकारी सेवा के दौरान अवैध तरीके से करोड़ों रुपये कमाए और उन्हें अचल संपत्तियों, सोना-चांदी और नकद रूप में निवेश किया।
ED की कार्रवाई: 92 करोड़ की संपत्ति जब्त
ईडी ने जिन संपत्तियों को अटैच किया है, वे मुख्य रूप से भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में स्थित हैं। ये संपत्तियां सौरभ शर्मा के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई थीं।
कैसे हुआ खुलासा?
दिसंबर 2024 में आयकर विभाग ने चेतन सिंह गौर नामक व्यक्ति की कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे।
जांच में पता चला कि यह पैसा सौरभ शर्मा से जुड़ा हुआ था।
सौरभ शर्मा ने परिवहन विभाग में रहते हुए ट्रांसपोर्ट माफिया से मोटी रिश्वत वसूली और उस पैसे को बेहिसाब संपत्ति में बदल दिया।
सौरभ शर्मा का बैकग्राउंड
- 2015 में अनुकंपा नियुक्ति के तहत परिवहन विभाग में भर्ती हुए।
- 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली।
- चेक पोस्टों पर अवैध वसूली कर करोड़ों की काली कमाई की।
- परिवार के नाम पर जमीनें, मकान और अन्य निवेश किए।
किन संपत्तियों को ED ने अटैच किया?
- भोपाल – अरेरा कॉलोनी में आलीशान बंगला
- इंदौर – अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम पर प्रॉपर्टी
- ग्वालियर – कृषि भूमि और प्लॉट
- बैंक अकाउंट्स में जमा करोड़ों की रकम
क्या होगी अगली कार्रवाई?
ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस काली कमाई का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।
अन्य अधिकारियों और ट्रांसपोर्ट माफिया के कनेक्शन की जांच जारी है।
अगर सौरभ शर्मा दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा का नाम मध्य प्रदेश के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट घोटालों में आ चुका है। ईडी की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार किस हद तक फैला हुआ है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।