राज्य सूचना आयोग को 45 दिन में फैसला करने के निर्देश..

इंदौर, 17 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश में SIR प्रक्रिया के दौरान Uncollectable Forms से जुड़ी जानकारी के लिए दाखिल RTI के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने राज्य सूचना आयोग को लंबित द्वितीय अपील पर 45 दिनों के भीतर निर्णय करने के निर्देश दिए हैं।

यह आदेश WP No. 37119/2026, दिलीप कौशल बनाम राज्य सूचना आयोग एवं अन्य मामले में न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने 17 सितंबर 2026 को पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी उपस्थित हुए।

RTI में मांगी गई थी SIR से जुड़ी जानकारी

मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, दिलीप कौशल ने 11 दिसंबर 2025 को RTI आवेदन देकर SIR कार्यक्रम के तहत मध्यप्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में तैयार की गई “Uncollectable Forms With Reason” की अंतिम रिपोर्ट की कंप्यूटर CD/DVD अथवा ई-मेल के माध्यम से प्रति मांगी थी।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए जवाब में ECINET पोर्टल पर प्रदर्शित जानकारी को आधिकारिक और आंतरिक उपयोग के लिए बताया गया था। दस्तावेज में आयोग के निर्देश का हवाला देते हुए कहा गया कि यह डेटा चुनावी रोल के प्रभावी पुनरीक्षण और प्रशासन के लिए है तथा इसे साझा, पुनरुत्पादित या किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।

इसके बाद प्रथम अपील दायर की गई। प्रथम अपीलीय अधिकारी के 29 जनवरी 2026 के आदेश में संबंधित अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी को निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप माना गया और अपील को अस्वीकार कर दिया गया। साथ ही आदेश में राज्य सूचना आयोग के समक्ष 90 दिनों के भीतर द्वितीय अपील का प्रावधान भी बताया गया।

राज्य सूचना आयोग में लंबित थी द्वितीय अपील

हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, याचिकाकर्ता की द्वितीय अपील क्रमांक TA-102/SIC/BHOPAL/2026, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 19(3) के तहत 30 जनवरी 2026 से लंबित थी।

इसी लंबित अपील का समयबद्ध तरीके से निराकरण कराने के लिए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सीमित प्रार्थना करते हुए कहा कि द्वितीय अपील लंबे समय से लंबित है और संबंधित प्राधिकरण ने अभी तक उस पर निर्णय नहीं लिया है। राज्य सूचना आयोग की ओर से भी कहा गया कि यदि अपील का निर्णय अभी नहीं हुआ है तो कोर्ट के निर्देश के अनुसार उसका निराकरण किया जा सकता है।

इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए राज्य सूचना आयोग/संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह TA-102/SIC/BHOPAL/2026 पर उपलब्ध रिकॉर्ड और कानून के आधार पर अपने merits पर फैसला करे।

कोर्ट ने कहा कि यह कार्य प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर, यथासंभव शीघ्र किया जाए और निर्णय का परिणाम याचिकाकर्ता को बताया जाए।

हाईकोर्ट ने मेरिट पर कोई राय नहीं दी

इस मामले में यह बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि उसने मामले के merits पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। यानी हाईकोर्ट ने फिलहाल यह तय नहीं किया कि मांगी गई RTI सूचना उपलब्ध कराई जानी चाहिए या नहीं। इस पर फैसला अब राज्य सूचना आयोग को करना है।

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