सीबीआई ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

नई दिल्ली/ इंदौर, 29 दिसंबर 2025: उन्नाव रेप केस में तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलवक्त रोक लगा दी है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंगर की पोक्सो में आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर दी थी और जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था, जिसको लेकर सीबीआई  ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत की अवकाशकालीन पीठ ने सुनवाई की और कहा कि हाई कोर्ट के जिस जज ने सुनवाई की वे बहुत अच्छे जज हैं लेकिन गलती किसी से भी हो सकती है। मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जब pocso के तहत कॉन्स्टेबल लोक सेवक हो सकता है तो विधायक को अलग क्यों रखा गया ? अब इस मामले में अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद हो सकती है।

सीबीआई के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाई कोर्ट यह नहीं समझ पाया कि सेंगर विधायक थे और वे जनता के विश्वास के पद थे ऐसे में उनकी ज़िम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। हाई कोर्ट ने सूप्रीम कोर्ट के 1984 के एक फैसले का आधार लिया था जिसमें एक जनप्रतिनिधि को आपराधिक कानून की परिभाषा में लोक सेवक नहीं माना गया था।

हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़िता, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दल कांग्रेस ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर पर एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप का आरोप लगा था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद निचली अदालत ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

यह मामला सिर्फ एक रेप केस तक सीमित नहीं रहा। पीड़िता के लिए न्याय की मांग कर रहे वकील के वाहन को एक ट्रक द्वारा 11 बार टक्कर मारी गई थी। इस भीषण हादसे में वकील गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि पीड़िता की मौसी की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके अलावा पीड़िता के पिता की जेल में कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी, जिसने पूरे मामले को और भी भयावह बना दिया।

पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि कुलदीप सेंगर जेल से बाहर आता है, तो उसकी और उसके परिवार की जान को गंभीर खतरा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला न सिर्फ पीड़िता की सुरक्षा बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।