मामला हाईकोर्ट के आदेश से शासन के समक्ष पहुँचा

भोपाल/इंदौर, 23 दिसंबर 2025 : देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर इन दिनों संपत्तिकर बढ़ोतरी को लेकर गंभीर विवाद में है। इंदौर नगर निगम परिषद द्वारा लिए गए फैसले से 7 लाख 30 हजार से अधिक करदाता सीधे प्रभावित हुए हैं। इस मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर नगरीय प्रशासन विभाग में शासन स्तर पर सुनवाई हुई।

नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद शुक्ला के समक्ष 23 दिसंबर को हुई सुनवाई में पूर्व पार्षद दिलीप कौशल और उनके अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने संपत्तिकर वृद्धि के प्रस्ताव को निरस्त करने और लगाए गए अतिरिक्त कर को वापस लेने की मांग रखी। उन्होंने तर्क दिया कि वर्ष 2020 में राज्य सरकार द्वारा जारी राजपत्र के अनुसार संपत्तिकर का निर्धारण कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर ही किया जाना अनिवार्य है, जबकि इंदौर नगर निगम परिषद ने इन नियमों को दरकिनार करते हुए पूर्व दरों पर सीधे 10 प्रतिशत की समानांतर वृद्धि कर दी।

दिलीप कौशल के अनुसार, वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 923 कॉलोनियों में कलेक्टर गाइडलाइन में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई, इसके बावजूद वहां टैक्स बढ़ा दिया गया। वहीं 146 नई कॉलोनियों का पहली बार मूल्यांकन होने के बावजूद उन पर भी कर वृद्धि लागू की गई। इसके अलावा 184 कॉलोनियों में जहां गाइडलाइन वृद्धि 0 से 10 प्रतिशत के बीच थी, वहां भी सभी पर समान रूप से 10 प्रतिशत टैक्स बढ़ा दिया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी करदाता को आपत्ति या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। नगर निगम परिषद द्वारा टैक्स स्लैब में बदलाव करते हुए 36 हजार रुपये की सीमा को 25 हजार, 60 हजार को 45 हजार और उससे ऊपर की सीमा को भी कम कर दिया गया, जिससे नागरिकों पर 25 से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त कर भार पड़ गया।

राज मोहल्ला, सुखलिया, जवाहर मार्ग, पत्रकार कॉलोनी, पालदा और कनाडिया सहित करीब 1200 कॉलोनियां इस फैसले से प्रभावित बताई गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब हर साल नागरिक करोड़ों रुपये टैक्स के रूप में देते हैं, तो शहर में जर्जर सड़कें, गंदे नाले और दूषित पानी जैसी समस्याएं क्यों बनी हुई हैं।

दिलीप कौशल ने इसे शासन के राजपत्र के खिलाफ और जनता पर “अनुचित कर थोपने” का मामला बताया। उन्होंने राजनीतिक सवाल भी उठाया कि जब नगर निगम परिषद में यह प्रस्ताव पारित हो रहा था, तब भाजपा विधायक मौन क्यों रहे और क्या नगर निगम परिषद शासन के आदेशों से ऊपर हो गई है।

अब इस पूरे मामले पर शासन स्तर पर निर्णय का इंतजार है, जिससे यह तय होगा कि इंदौर के लाखों करदाताओं को राहत मिलेगी या नहीं।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।