इंदौर में जनसुनवाई का असर: प्रशासन, निगम और पुलिस—तीनों स्तर पर शिकायतों की सुनवाई, समाधान के दावे और सवाल भी
इंदौर, 05 मई 2026।
मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई एक बार फिर आमजन के लिए अपनी बात रखने का प्रमुख मंच बनी, जहां जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस—तीनों स्तरों पर नागरिकों ने अपनी समस्याएं रखीं। बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों में जहां एक ओर त्वरित निराकरण और संवेदनशीलता देखने को मिली, वहीं कुछ मुद्दों पर असंतोष और सवाल भी सामने आए।
कलेक्टर कार्यालय में हुई जनसुनवाई में 300 से अधिक आवेदन पहुंचे। इनमें जमीन विवाद, कब्जे, माता-पिता भरण-पोषण, पीएम आवास, घरेलू व पारिवारिक विवाद प्रमुख रहे। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कई मामलों का मौके पर ही निराकरण किया, जबकि अन्य आवेदनों को संबंधित विभागों को समयसीमा में कार्रवाई के निर्देशों के साथ भेजा गया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता प्रकरणों का त्वरित निराकरण है और कई मामलों में मध्यस्थता व काउंसलिंग के जरिए समाधान निकाला जा रहा है।
इसी जनसुनवाई में सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी कोर्ट के आदेश पर पहुंचे और इंदौर मेट्रो परियोजना को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मेट्रो बिना समुचित योजना के बनाई जा रही है, जिससे पर्यावरण, भूजल और शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि गजट नोटिफिकेशन के अनुरूप कार्य नहीं हो रहा है। कोडवानी के अनुसार कलेक्टर ने इस अभ्यावेदन पर जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, एआईसीटीएसएल सिटी बस के छात्र पास किराए में बढ़ोतरी को लेकर भी जनसुनवाई में विरोध देखने को मिला। छात्रों ने बढ़े हुए किराए पर आपत्ति जताई, जहां स्टूडेंट्स, दिव्यांगजन, सीनियर सिटीजन बस पास, 200 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये और आम नागरिक बस पास 800 रुपये वाले पास को 1200 रुपये कर दिया गया है। जिस पर कलेक्टर ने व्यक्तिगत स्तर पर मदद की बात कहते हुए आवेदन को सम्बंधित निकाय में भेजने का आश्वासन दिया, जिससे छात्रों में निराशा देखी गई।
इसी दिन नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल द्वारा भी जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसमें 60 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें राजस्व, भवन अनुज्ञा, सीवरेज, स्वास्थ्य, जनकार्य और बाजार से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। आयुक्त ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और आवेदनों को संबंधित विभागों को प्रेषित किया।
पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह द्वारा आयोजित जनसुनवाई में 80 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें पारिवारिक विवाद, लेन-देन, फाइनेंशियल फ्रॉड, महिला अपराध और जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामले प्रमुख रहे। पुलिस ने कई मामलों में मौके पर कार्रवाई शुरू की और मध्यस्थता केंद्रों के माध्यम से विवाद सुलझाने के प्रयास जारी रखने की बात कही।
इसी बीच, कलेक्टर जनसुनवाई के सकारात्मक पहलू भी सामने आए। एक गंभीर बीमारी से जूझ रही बालिका को समय पर इलाज मिलने पर उसके परिजनों ने प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं नेहरू नगर क्षेत्र में मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को उपचार के लिए भेजे जाने से स्थानीय लोगों को राहत मिली।
कुल मिलाकर, जनसुनवाई ने जहां प्रशासनिक सक्रियता और त्वरित समाधान की तस्वीर पेश की, वहीं मेट्रो निर्माण और बस किराया वृद्धि जैसे मुद्दों ने यह भी संकेत दिया कि कई बड़े फैसलों पर अब भी संवाद और पारदर्शिता की जरूरत बनी हुई है।
