भोपाल/नई दिल्ली, 13 मई। मध्यप्रदेश के आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौर द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी ने भारतीय रेलवे की यात्री क्षमता और टिकट उपलब्धता को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखी है। वित्तवर्ष 2025-26 में प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में रहने के कारण यात्रा नहीं कर पाने वाले यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड 3.39 करोड़ तक पहुंच गई।

आंकड़ों के अनुसार, पूरे वर्ष में औसतन प्रतिदिन करीब 92,877 यात्री टिकट कन्फर्म न होने से यात्रा से वंचित रहे। यह संख्या प्रति घंटे लगभग 3,870, प्रति मिनट 64 और प्रति सेकंड एक से अधिक यात्री के बराबर है।

RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, सबसे अधिक प्रभावित गैर-वातानुकूलित श्रेणी रही, जहां कुल 1.94 करोड़ यात्री यात्रा नहीं कर सके। इसमें स्लीपर क्लास के 1.68 करोड़ और सेकंड सीटिंग (2S) के 26.46 लाख यात्री शामिल हैं। यह कुल प्रभावित यात्रियों का लगभग 57 प्रतिशत है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्लीपर और सेकंड सीटिंग श्रेणियां देश की कामकाजी आबादी, प्रवासी मजदूरों, छात्रों, निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। ऐसे में इन श्रेणियों में भारी प्रतीक्षा सूची रेलवे की बुनियादी क्षमता पर सवाल खड़े करती है।

वातानुकूलित श्रेणियों में भी स्थिति चिंताजनक रही। 3AC श्रेणी में 74.55 लाख, 3E में 23.71 लाख और 2AC में 24.21 लाख यात्री टिकट कन्फर्म न होने से प्रभावित हुए।

तुलनात्मक रूप से देखें तो वित्तवर्ष 2021-22 में यह संख्या 1.65 करोड़ थी, जो चार वर्षों में दोगुनी होकर 3.39 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इससे स्पष्ट है कि व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों और सीटों की उपलब्धता मौजूदा मांग के मुकाबले बेहद कम है।

चंद्रशेखर गौर ने कहा कि रेलवे जहां भविष्य की परियोजनाओं और आधुनिक ट्रेनों के दावे कर रहा है, वहीं वर्तमान में आम यात्रियों को बुनियादी सुविधा—कन्फर्म टिकट—भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही। उन्होंने मांग की कि रेलवे को वर्तमान संकट से निपटने के लिए व्यस्त मार्गों पर अतिरिक्त ट्रेनों, कोचों और बेहतर योजना पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में प्रतीक्षा सूची की समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आजादी के 78 वर्ष बाद भी रेलवे टिकट का कन्फर्म होना करोड़ों यात्रियों के लिए सामान्य सुविधा के बजाय भाग्य पर निर्भर बना हुआ है।

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