नई दिल्ली/ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) निदेशक चयन प्रक्रिया पर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को असहमति नोट सौंपते हुए सरकार पर चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बनाने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि नेता प्रतिपक्ष कोई “रबर स्टाम्प” नहीं है और वह ऐसी प्रक्रिया का हिस्सा बनकर अपने संवैधानिक दायित्व से विमुख नहीं हो सकते।
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली स्थित सात, लोक कल्याण मार्ग आवास पर सीबीआई निदेशक चयन समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और राहुल गांधी शामिल हुए। बैठक के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी असहमति सार्वजनिक करते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर चयन प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने बार-बार राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए सीबीआई जैसी प्रमुख जांच एजेंसी का दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा कि संस्थागत निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ही नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति में शामिल किया गया, लेकिन उन्हें इस प्रक्रिया में कोई सार्थक भूमिका नहीं दी गई।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कई लिखित अनुरोधों के बावजूद उन्हें उम्मीदवारों की स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट और 360-डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित रखकर चयन प्रक्रिया को महज औपचारिकता में बदल दिया गया, जिससे पूर्व-निर्धारित उम्मीदवार के चयन का रास्ता साफ हो सके।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में यह भी याद दिलाया कि उन्होंने पूर्व में पांच मई 2025 और 21 अक्टूबर 2025 को भी पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सरकार को सुझाव दिए थे, लेकिन उन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि बिना वैधानिक आधार के आवश्यक सूचनाओं को रोके रखना चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
राहुल गांधी ने अंततः अपने असहमति नोट में कहा कि विपक्ष के नेता की भूमिका केवल औपचारिक सहमति देने तक सीमित नहीं हो सकती और वह इस पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया का समर्थन नहीं करेंगे।
