क्या महापौर इस तरह किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग का नाम बदल सकते हैं ?
इंदौर, 25 दिसंबर 2025: भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी की आज 101वीं जयंती के अवसर पर इंदौर नगर निगम परिषद ने शहर से गुजरने वाली आगरा–बॉम्बे रोड (AB रोड) का नाम परिवर्तित कर “अटल बिहारी मार्ग” करने का निर्णय लिया है।
इसकी घोषणा महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम परिषद की बैठक के बाद की। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। विशेष रूप से स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के माध्यम से उन्होंने शहरों को गांवों से और गांवों को पंचायतों से जोड़ने का कार्य किया, जो देश के विकास में एक अतुलनीय योगदान है।
महापौर ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का नाम केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सुशासन, विकास और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक रहे हैं। उनके सम्मान में AB रोड का नामकरण आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान की याद दिलाएगा। महापौर भार्गव ने ये भी कहा कि वे जल्द ही केंद्र सरकार से निवेदन करेंगे कि देश में गुजरने वाली एबी रोड का नामकरण अटल बाजपेयी मार्ग किया जाये।
कानूनी सवाल भी उठे
नगर निगम के इस फैसले पर वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र सिंह यादव ने अहम कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा—
“नगर निगम का यह प्रस्ताव पहली नज़र में श्रद्धांजलि और सम्मान का प्रतीक लगता है, लेकिन यदि इसे कानूनी और प्रशासनिक दृष्टि से देखा जाए तो मामला इतना सरल नहीं है। आगरा–मुंबई मार्ग कोई साधारण नगर सड़क नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग है। ऐसे में नगर निगम का प्रस्ताव भावनात्मक रूप से सही, लेकिन कानूनी रूप से अधूरा है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि मेयर-इन-काउंसिल और नगर निगम परिषद का प्रस्ताव केवल सिफारिश तक सीमित है। “इस तरह के नाम परिवर्तन का अंतिम निर्णय राज्य और केंद्र सरकार की अधिसूचना से ही होता है। यदि पूरी प्रक्रिया के बिना केवल नामपट्ट बदल दिए गए, तो यह फैसला कागज़ों में पास और ज़मीन पर विवाद बन सकता है।”
वरिष्ठ पत्रकार ने सवाल उठाया कि नाम बदलने से ज़्यादा ज़रूरी मुद्दे भी शहर के सामने खड़े हैं। “असल सवाल यह है कि क्या शहर में विकास, ट्रैफिक प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं पर भी उतनी ही गंभीरता दिखाई जा रही है? नामकरण राजनीति का विषय बन सकता है, लेकिन कानून अपनी जगह अडिग रहता है — और यही इस पूरे मामले की असली कसौटी है।”
