डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया बोले—जांच में शिकायतकर्ता सामने नहीं आया, कॉलेज में रैगिंग पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति लागू
इंदौर, 22 दिसंबर 2025: एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के मामलों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2025 बैच के जूनियर छात्रों द्वारा रैगिंग की शिकायत सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने सोमवार, 22 दिसंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर शिकायत को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया।
कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने कहा कि “कई बार छात्र आपसी ईर्ष्या या एक-दूसरे को परेशान करने के उद्देश्य से भी शिकायत कर देते हैं।” उन्होंने बताया कि 18 दिसंबर को प्राप्त गुमनाम शिकायती पत्र के आधार पर जांच की गई । सभी सीनियर-जूनियर छात्रों के बयान लिए गए और व्यक्तिगत रूप से भी पूछताछ हुई, लेकिन शिकायतकर्ता सामने नहीं आया।
डीन ने कहा हाल ही में हुई शिकायत में उन दो छात्रों को भी आरोपी बताया गया है जो पहले की रैगिंग शिकायत में दोषी पाए जाकर निलंबन की अवधि में हैं। “जांच में यही निष्कर्ष निकला कि यह शिकायत एक-दूसरे को परेशान करने और आपसी grudge ईर्ष्या के उद्देश्य से की गई है,” । उन्होंने दोहराया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज रैगिंग के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति पर काम करता है और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब यह सवाल उठाया गया कि शिकायतकर्ता एक महिला है जिसने कॉलेज में एचओडी की टेबल पर शिकायत पत्र रखा था और सीसीटीवी फुटेज में क्या सामने आया है, तो डीन ने केवल इतना कहा कि मामले की जांच की जा रही है, लेकिन महिला की पहचान या फुटेज को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस महिला ने शिकायत पत्र रखा, वह एक डॉक्टर की पत्नी है और उनका बेटा एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है। आरोप है कि उनके बेटे को सीनियर छात्रों द्वारा रैगिंग के नाम पर प्रताड़ित किया गया। आरोप है कि एमबीबीएस के 2025 बैच के जूनियर छात्रों को 2024 के सीनियर छात्र परेशान करते हैं। निजी फ्लैट पर बुलाकर शराब, सिगरेट और आइटम सॉन्ग पर नचबाते हैं। क्रिकेट खेलते समय भी फील्डिंग कराते हैं बैटिंग का चांस नहीं देते।
एक माह में दूसरी बार रैगिंग के आरोप
गौरतलब है कि इसके पहले बीते 18 नवंबर को जूनियर छात्रों ने यूजीसी में रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने 20 नवंबर को एंटी-रैगिंग सेल की बैठक कर चार सीनियर छात्रों को एक माह के लिए निलंबित किया था। उस शिकायत में भी निजी फ्लैट पर बुलाकर मारपीट, अपशब्द कहने, शराब-सिगरेट पीने के लिए दबाव बनाने और घंटों तक बंधक रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
अब सवाल यह है कि जब बार-बार रैगिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो क्या कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई रैगिंग रोकने के लिए पर्याप्त है, या फिर डर के माहौल में जूनियर छात्र सामने आकर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं ?

