नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट्स के सात सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) के रूप में नामित किया है। यह निर्णय हाल ही में लिया गया, जिसके तहत न्यायपालिका में लंबे अनुभव और योगदान को देखते हुए इन पूर्व न्यायाधीशों को यह सम्मान प्रदान किया गया है।

जिन पूर्व न्यायाधीशों को वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया है, उनमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल, गुजरात हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस हर्षा नथालाल देवानी, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एमएस रमेश, गुजरात हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मौना एम भट्ट, मद्रास हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आरएन मंजुला, उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस उमेश चंद्र ध्यानी तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस विनोद चटर्जी कौल शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया जाना विधिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सम्मान माना जाता है। यह दर्जा उन अधिवक्ताओं को दिया जाता है जिन्होंने न्यायिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया हो और जिनकी विशेषज्ञता एवं अनुभव न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

उल्लेखनीय है कि सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व न्यायाधीशों को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किए जाने की परंपरा समय-समय पर अपनाई जाती रही है, जिससे उनके अनुभव का लाभ न्यायालयी कार्यवाही में मिल सके।