राज्य सरकार व ASI से जवाब तलब

इंदौर, 20 मार्च (न्यूज़ओ2):
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में धार स्थित भोजशाला को जैन धरोहर, जैन गुरुकुल एवं जैन मंदिर घोषित करने तथा जैन समाज के अधिकारों के संरक्षण को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर शुक्रवार को विस्तृत सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता सलेक चन्द जैन द्वारा दायर इस जनहित याचिका पर राज्य सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने की।

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सभी प्रतिवादियों से 2 अप्रैल 2026 तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया कि सभी पक्ष अपनी लिखित आपत्तियां भी निर्धारित तिथि से पहले दाखिल करें।

अदालत ने भोजशाला पर जैन अधिकार से जुड़े अन्य प्रकरणों के साथ इस जनहित याचिका को भी कनेक्ट करने का आदेश दिया है। हालांकि, शुक्रवार को केवल जैन अधिकार से संबंधित याचिका पर ही सुनवाई की गई।

याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर (दिल्ली) ने मुख्य पैरवी करते हुए विस्तृत दलीलें प्रस्तुत कीं। सुनवाई के दौरान प्रिया जैन (इंदौर) भी न्यायालय में उपस्थित रहीं।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि भोजशाला परिसर के सर्वे में जैन तीर्थंकरों तथा यक्ष-यक्षिणियों की खंडित मूर्तियों के अवशेष मिले हैं, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट में इन्हें जैन धर्म से संबंधित नहीं बताया।

इसके अलावा, एक सप्तफणी छत्र (कैनोपी) मिलने का भी दावा किया गया है, जिसे याचिका में भगवान पारसनाथ, धरनेन्द्र या पद्मावती देवी से संबंधित बताया गया है, जबकि अन्य पक्ष इसे वासुकी नाग से जोड़कर प्रचारित कर रहे हैं।

याचिकाकर्ता के अनुसार, जनहित याचिका के स्वीकार (Admit) होने और प्रतिवादियों से जवाब तलब किए जाने को इस मामले में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।