भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर (आईआईएम इंदौर) ने आज अपना 27वाँ वार्षिक दीक्षांत समारोह गर्व और उत्साह के साथ आयोजित किया, जिसमें स्नातक होने वाले प्रतिभागियों की उल्लेखनीय उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया। बीसीजी इंडिया के चेयरमैन डॉ. जनमेजय सिन्हा इस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने दीक्षांत भाषण दिया। इस वर्ष सात प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रमों के 798 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जो उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अपने उद्घाटन संबोधन में आईआईएम इंदौर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन श्री एम. एम. मुरुगप्पन ने स्नातक होने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने नेतृत्व और संस्थान कि प्रासंगिकता पर एक विचारोत्तेजक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि किसी महान संस्थान की पहचान केवल उसकी दीर्घायु नहीं होती, बल्कि लगातार बदलती दुनिया में उसकी प्रासंगिकता बनाए रखने की क्षमता ही वास्तविक महत्व रखती है। उन्होंने प्रो. हिमांशु राय के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की और पिछले सात वर्षों में उनके कार्यकाल के दौरान किए गए सभी महत्वपूर्ण पहलों की प्रशंसा की, जिन्होंने आईआईएम इंदौर को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाया है।
जटिल (complex) और जटिल-प्रकार (complicated) चुनौतियों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, “जहाँ complicated समस्याओं के स्पष्ट समाधान हो सकते हैं, वहीं complex समस्याएँ विचारशील और अनुकूलनशील प्रतिक्रिया की मांग करती हैं।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान पीढ़ी के प्रबंधकों की सबसे महत्वपूर्ण क्षमता केवल समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि अनिश्चितताओं के बीच स्पष्टता और दृढ़ता के साथ मार्गदर्शन करना होगी। उन्होंने स्नातकों को नेतृत्व के मूल गुण: निडरता, उदारता, विवेक और ऊर्जा: को अपनाने के लिए प्रेरित किया और उन्हें अपने पेशेवर जीवन में आगे बढ़ते हुए इन मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह किया।
आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने अपने संबोधन में जीवन की यात्रा में मार्गदर्शन देने वाले तीन प्रमुख कारकों का उल्लेख किया। उन्होंने उद्देश्य की स्पष्टता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि तीव्र गति से बदलती दुनिया में एक सशक्त उद्देश्य व्यक्ति के लिए आंतरिक दिशा-सूचक यानि कम्पास का कार्य करता है और सफलता की व्यक्तिगत परिभाषा को निर्धारित करता है। उन्होंने चरित्र की दृढ़ता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि ईमानदारी तथा विश्वसनीयता नेतृत्व की वास्तविक नींव होती है, विशेषकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में। तीसरे कारक के रूप में योगदान की भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि करुणामय और उत्तरदायी नेतृत्व के माध्यम से समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव से भी मापें।”
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में आईआईएम इंदौर अपनी वर्तमान प्रगति को आगे बढ़ाते हुए वैश्विक सहयोगों का विस्तार, अनुसंधान उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने तथा उद्योग और समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप नवोन्मेषी कार्यक्रमों की शुरुआत करने का लक्ष्य रखता है।
अपने दीक्षांत संबोधन में, मुख्य अतिथि डॉ. जनमेजय सिन्हा ने आज के समय में नेतृत्व पर एक गहन और मानवीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्नातकों को यह स्मरण कराया कि सभी प्रणालियों, रणनीतियों और प्रौद्योगिकियों के केंद्र में मनुष्य ही होते हैं, और यह आवश्यक है कि हम उन्हें संवेदनशील (sentient) प्राणी के रूप में समझें। भावनात्मक बुद्धिमत्ता और जागरूकता के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने “LOCALE” शब्द का एक संक्षिप्त रूप (anagram) को प्रभावी नेतृत्व के मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इसके प्रत्येक अक्षर का अर्थ है: Listening (सुनना), Observation (अवलोकन), Curiosity (जिज्ञासा), Affirmation (स्वीकृति/प्रोत्साहन), Learning (सीखना) और Empathy (सहानुभूति)।
उन्होंने कहा, “ये सभी सिद्धांत मिलकर प्रबंधकों को लोगों और परिस्थितियों के साथ अधिक सार्थक रूप से जुड़ने में सक्षम बनाते हैं, जिससे विश्वास, समझ और सहयोग को मजबूती मिलती है।” उन्होंने स्नातकों को इन मूल्यों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि वैश्विक जटिलताओं के बीच आगे बढ़ते हुए सच्चा नेतृत्व केवल निर्णय लेने में नहीं, बल्कि लोगों को समझने, उनसे जुड़ने और उन्हें प्रेरित करने की क्षमता में निहित होता है।
इस महत्वपूर्ण अवसर को और गौरवपूर्ण बनाते हुए स्वर्ण पदक विजेताओं को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं समग्र प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया, जो स्नातक वर्ग द्वारा प्राप्त सर्वोच्च स्तर की उत्कृष्टता का प्रतीक है।
आईआईएम इंदौर का 27वाँ वार्षिक दीक्षांत समारोह उत्कृष्टता और नेतृत्व की भावना का एक भव्य उत्सव रहा, जिसने स्नातकों को आत्मविश्वास और नई आकांक्षाओं के साथ अपने भविष्य की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया।
