लंदन से सरस्वती / वाग्देवी की प्रतिमा लाने पर केंद्र सरकार विचार करे
इंदौर, 15 मई 2026 :
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट यह दर्शाती है कि वर्तमान संरचना के नीचे पूर्व-स्थित मंदिरनुमा ढांचा मौजूद था। कोर्ट ने भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को देवी वाग्देवी (सरस्वती) से जुड़ा माना और 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकार सीमित किए गए थे तथा मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी गई थी।
खंडपीठ ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्य न्यायिक निष्कर्ष का आधार बन सकते हैं और ASI की नवीनतम वैज्ञानिक रिपोर्ट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विवादित स्थल को जैन मंदिर बताने के दावे के समर्थन में कोई ठोस ऐतिहासिक, वास्तुशिल्पीय या ASI सर्वे प्रमाण नहीं मिला।
कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद परिसर वर्ष 1904 से संरक्षित स्मारक है और इसका संरक्षण ASI अधिनियम के तहत किया जाएगा। साथ ही ASI को परिसर के संरक्षण, रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों के नियमन का पूर्ण अधिकार दिया गया है।
फैसले में केंद्र सरकार को यह भी सुझाव दिया गया कि लंदन म्यूजियम में बताई जा रही मां सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाने और भोजशाला परिसर में पुनर्स्थापित करने संबंधी मांगों पर विचार किया जा सकता है।
मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष आवेदन देता है तो राज्य सरकार धार जिले में मस्जिद निर्माण के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने पर कानून के अनुसार विचार कर सकती है।
यह फैसला जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने WP No.10497/2022 सहित संबंधित याचिकाओं पर सुनाया।
जैन पक्ष की ओर से याची सलेक चंद्र जैन और उनकी इंदौर से अधिवक्ता प्रिया जैन ने बताया कि वे हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
