इंदौर में ‘स्वामित्व’ कार्यक्रम पर भी सवाल ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर मध्यप्रदेश भाजपा आज से ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू कर रही है। प्रदेश में यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलना है।

इसी बीच सवाल उठ रहा है कि अगर प्रधानमंत्री को जन्मदिन की सच्ची बधाई देनी है, तो भाजपा के पार्षद, विधायक, सांसद और मंत्री सरकारी दफ्तरों में लंबित आम जनता की शिकायतों और आवेदनों के निराकरण को अभियान का हिस्सा क्यों नहीं बनाते? कलेक्टर कार्यालय से लेकर नगर निगम, बिजली विभाग, जोनल कार्यालय, टीएंडसीपी, पुलिस, स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों में लंबित मामलों की समीक्षा और समयबद्ध समाधान को प्राथमिकता देने की मांग उठ रही है।

वहीं 17 सितंबर को इंदौर के गांधीनगर ग्राउंड में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ का प्रदेशव्यापी शुभारंभ करेंगे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार योजना के तहत करीब 50 लाख निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेखों का निःशुल्क पंजीयन प्रस्तावित है।

सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम को लेकर कुछ पटवारियों में सवाल हैं कि जिन जमीनों पर पहले से अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं, वहां दोबारा पंजीयन की प्रक्रिया में पटवारियों की भूमिका क्यों रखी जा रही है। सूत्रों का यह भी दावा है कि कार्यक्रम की औपचारिकता के लिए पांच पटवारियों को साथ लाया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

यहीं से सवाल राजनीतिक भी हो जाता है—क्या ‘सेवा संकल्प अभियान’ वास्तव में लंबित जनशिकायतों के समाधान का अभियान बनेगा, या फिर सरकारी योजनाओं और आयोजनों तक सीमित रहेगा? और इंदौर के स्वामित्व कार्यक्रम में उठ रहे पटवारियों के सवालों का सरकार क्या जवाब देती है?

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