इंदौर। मध्यप्रदेश में मेडिकल ऑफिसर्स की पदस्थापना को लेकर चल रही ऑनलाइन चॉइस फिलिंग और पोस्टिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दायर याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नारायण तिवारी एवं अधिवक्ता प्रशांत राजपूत ने पैरवी की।
ऑनलाइन चॉइस के बाद फिजिकल चॉइस का मुद्दा
याचिका में मुख्य रूप से मेडिकल ऑफिसर्स की पदस्थापना में मेरिट और अभ्यर्थियों की ओर से दी गई प्राथमिकताओं के अनुरूप पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए जाने का मुद्दा उठाया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहले अभ्यर्थियों से ऑनलाइन माध्यम से चॉइस फिलिंग कराई गई। इसके बाद ऑनलाइन प्रक्रिया में शामिल नहीं होने वाले कुछ अभ्यर्थियों को फिजिकल चॉइस फिलिंग का अवसर दिया गया। याचिका में इसी प्रक्रिया और उसके आधार पर की गई पदस्थापनाओं को चुनौती दी गई है।
समान अवसर और पारदर्शिता पर सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जब सभी अभ्यर्थियों से ऑनलाइन माध्यम से विस्तृत प्राथमिकताएं मांगी गई थीं, तो बाद में कुछ अभ्यर्थियों को भौतिक रूप से चॉइस भरने का अवसर दिए जाने से प्रक्रिया की समानता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मेरिट और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर एकीकृत रूप से दोबारा चॉइस फिलिंग और पदस्थापना प्रक्रिया अपनाई जाए।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
मेडिकल ऑफिसर्स की चॉइस फिलिंग के दौरान इससे पहले भी चिकित्सकों की ओर से सीटों की उपलब्धता और उनके आवंटन को लेकर सवाल उठाए गए थे। मीडिया रिपोर्टों में भी पदस्थापना प्रक्रिया को लेकर चिकित्सकों की आपत्तियां सामने आई थीं।
अब हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद संबंधित पक्षों के जवाब पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।
