मां के जेवर गिरवी रखकर पढ़ाई, 8 साल से भर्ती का इंतजार, 2020 में नर्सिंग एडमिशन फिर भी 2026 में तीसरा साल… इंदौर में छात्रों ने राहुल गांधी के सामने रखी अपनी बेबसी

इंदौर, 19 सितंबर 2026: इंदौर में 19 सितंबर को हुए कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी के सामने युवाओं ने सिर्फ शिक्षा और रोजगार के मुद्दे नहीं उठाए, बल्कि अपनी निजी परेशानियों और टूटती उम्मीदों की कहानी भी सुनाई। कार्यक्रम में कांग्रेस ने करीब 2 लाख युवाओं के जुड़ने का दावा किया। डोम की क्षमता करीब 20 हजार बताई गई, जबकि आयोजन स्थल के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

राहुल गांधी शाम 6.47 बजे मंच पर पहुंचे, जबकि उनके पहुंचने का निर्धारित समय शाम 5.30 बजे था। ब्लैक टीशर्ट में मंच पर पहुंचे राहुल ने अपने संबोधन में छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार, शिक्षा, रोजगार और सरकारी भर्ती के मुद्दों पर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को घेरा।

लेकिन इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी कहानी मंच पर राहुल गांधी का संवाद नहीं, बल्कि वे छात्र थे जिन्होंने अपनी जिंदगी की मुश्किलें सामने रखीं।

किसी ने कहा कि फीस भरने के लिए मां के जेवर गिरवी रखने पड़े, किसी ने पढ़ाई के लिए जमीन गिरवी रखी। कोई वर्षों से सरकारी भर्ती का इंतजार कर रहा है तो कोई परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति के लिए भटक रहा है।

‘दो परीक्षा पास कीं, फिर भी नियुक्ति नहीं’

राजगढ़ से आई छात्रा ने सरकारी भर्ती और आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रखी। उसने बताया कि उसने दो परीक्षाएं पास कीं, लेकिन नियुक्ति नहीं मिली। छात्रा ने कहा कि 13 प्रतिशत आरक्षण के मामले को लेकर अभ्यर्थी वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। उसने पटवारी भर्ती में आरक्षण को लेकर भी सवाल उठाया। उसकी अपील थी—“आपको न्याय का योद्धा कहा जाता है, आपसे उम्मीद है कि हमें न्याय दिलाएंगे।”

2020 में नर्सिंग में एडमिशन, 2026 में भी तीसरा साल

नर्सिंग छात्रा याशिका दानी की कहानी ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं की समस्या को एक अलग तस्वीर दी। याशिका ने बताया कि उसने 2020 में एडमिशन लिया था। चार साल में कोर्स पूरा होना था, लेकिन 2026 में भी वह तीसरे वर्ष में है। परीक्षा और रिजल्ट में देरी के कारण पढ़ाई लगातार खिंचती चली गई। फीस के पैसे जुटाने के लिए उसने कॉल सेंटर में नौकरी की। भोपाल में करीब एक महीने आंदोलन भी किया, लेकिन उसके मुताबिक समस्या का समाधान नहीं हुआ।

‘एजुकेशन लक्जरी नहीं, सबका हक है’

छात्रों की बात सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा गांवों तक पहुंचनी चाहिए। शिक्षा कोई लक्जरी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का अधिकार है। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट की पहचान उसकी जिज्ञासा, सवाल पूछने की क्षमता, मोहब्बत और विनम्रता से होती है। जो सवाल पूछता है और जवाब तलाशता है, वह निडर होता है। राहुल ने कहा कि जिज्ञासा, ईमानदारी, विनम्रता और सहनशीलता से देश बनता है।

‘सिस्टम नहीं चाहता कि स्टूडेंट सवाल पूछे’

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार पर कई आरोप लगाए। उन्होंने अडानी-अंबानी का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सिस्टम नहीं चाहता कि स्टूडेंट सवाल पूछे। कार्यक्रम में छात्रों के सवालों के बाद ऐसे वीडियो भी दिखाए गए, जिनके जरिए राजनीतिक समर्थकों पर टिप्पणी की गई।

भर्ती, व्यापमं और खाली पदों का मुद्दा

कार्यक्रम में एमपीपीएससी, शिक्षक भर्ती, व्यापमं, पेपर लीक और सरकारी पदों की रिक्तियों के मुद्दे भी उठे। छात्रों ने दावा किया कि बड़ी संख्या में सरकारी पद खाली हैं और भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। कृषि भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी मंच पर उठा। वर्ग-2 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के आंदोलन का जिक्र करते हुए छात्रों ने कहा कि भोपाल में उनका आंदोलन जारी है। इस पर राहुल गांधी ने कहा—“मुझे भी बुलाओ आंदोलन में।”

24 हजार का आवास भत्ता, बढ़ता किराया

बाहर से आकर पढ़ने वाले छात्रों ने हॉस्टल और आवास भत्ते की समस्या भी बताई। छात्रों के मुताबिक सालाना करीब 24 हजार रुपये आवास भत्ता मिलता है, लेकिन इसका भुगतान नियमित नहीं होता। दूसरी तरफ कमरों का किराया हर साल बढ़ रहा है। आदिवासी छात्रों ने हॉस्टल की संख्या बढ़ाने और सरकारी हॉस्टलों की स्थिति सुधारने की मांग की। बस पास की कीमत बढ़ने का मुद्दा भी सामने आया—छात्रों ने बताया कि करीब 200 रुपये का पास अब 600 रुपये तक पहुंच गया है।

‘हमारे कारण रोजगार, लेकिन हमें ही नौकरी नहीं’

इंदौर की शिक्षा आधारित अर्थव्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए छात्रों ने कहा कि देशभर से पढ़ने आने वाले लाखों युवाओं से शहर में कई लोगों को रोजगार मिलता है, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्हीं छात्रों को नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के एक छात्र ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह ‘अंधभक्त’ नहीं है, इसलिए उसे पीजी में एडमिशन नहीं मिला।

अर्पित जाट की मौत ने उठाया सुरक्षा का सवाल

कार्यक्रम में दिल्ली हादसे में जान गंवाने वाले देवास के अर्पित जाट का मुद्दा भी उठा। उसके परिवार की ओर से सिस्टम की कथित लापरवाही पर सवाल उठाए गए। परिवार ने बताया कि अर्पित उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर गया था। राहुल गांधी ने इस घटना को शिक्षा के लिए घर से दूर जाने वाले छात्रों की सुरक्षा और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए।

‘हम स्टूडेंट्स का हिंदुस्तान चाहते हैं’

कार्यक्रम के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं की टूटी उम्मीदों को वापस लाना और शिक्षा पर उनका भरोसा बहाल करना है। उन्होंने छात्रों से कहा—“I am proud of you, I love you. आप इस देश के भविष्य हो, कभी मत भूलो।

इंदौर की ‘छात्रों की गूंज’ में राजनीतिक आरोप और जवाब अपनी जगह थे, लेकिन मंच पर सामने आई छात्रों की कहानियों ने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया—डिग्री, परीक्षा और सालों की मेहनत के बाद भी अगर नौकरी, हॉस्टल, छात्रवृत्ति और नियुक्ति का इंतजार खत्म नहीं हो रहा, तो युवाओं के भविष्य की जिम्मेदारी किसकी है ?

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