मातृभाषा से जुड़े, संस्कृति को दें नई ऊर्जा: भारतीय भाषा पर्व में गूंजा संदेश

इंदौर, 22 फरवरी 2026: अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर डॉक्टर हेडगेवार स्मारक समिति एवं भारतीय भाषा संवर्धन समिति के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय भाषा पर्व’ का भव्य एवं गरिमामय आयोजन नूतन स्कूल (चिमन बाग) के फुटबॉल ग्राउंड में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर विभिन्न भाषाई समाजों ने अपनी-अपनी संस्कृति, साहित्य, लोकपरंपराओं और पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से भारत की “विविधता में एकता” का जीवंत प्रदर्शन किया।

संस्कृति और भाषा का गहरा नाता

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पी. नरहरि (प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, म.प्र.) ने कहा कि भारत की संस्कृति मूलतः एक है, भले ही यहां हर चार कोस पर बोली बदल जाती है। बच्चों के मानसिक विकास के लिए मातृभाषा का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विजयनगर साम्राज्य के सम्राट श्री कृष्णदेवराय का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार उन्होंने भाषाओं और संस्कृति को संरक्षण देकर राज्य का विस्तार किया, उसी प्रकार हमें भी अपनी भाषाओं को वैश्विक स्तर पर गौरव दिलाना चाहिए।

सेना केवल सीमाओं की नहीं, संस्कृति की भी रक्षक

विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त मेजर जनरल सरबजीत सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि मातृभाषा सीखने के लिए किसी विद्यालय की आवश्यकता नहीं होती, यह परिवार से स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि सेना के जवान न केवल देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति और मूल्यों के भी संरक्षक हैं। युवाओं से उन्होंने अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने का आह्वान किया।

भाषा केवल संवाद नहीं, संवेदना है

मुख्य वक्ता प्रवीण गुप्त (क्षेत्र संपर्क प्रमुख) ने कहा कि भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदना और संस्कारों की वाहक है। उन्होंने पाश्चात्य प्रभाव के कारण भाषा के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशी भाषाओं के प्रभाव से हम अपनी परंपराओं और वेशभूषा से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने दैनिक जीवन में मातृभाषा के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि हस्ताक्षर भी अपनी भाषा में करने चाहिए। “मदर शब्द में वह आत्मीयता नहीं है, जो ‘माँ’ कहने में है,” उन्होंने कहा।

विविधता का अनूठा संगम

कार्यक्रम संयोजक रविंद्र देशपांडे ने बताया कि इस पर्व में संस्कृत, निमाड़ी, मालवी, भीली, मैथिली, भोजपुरी, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, तमिल, मराठी, पंजाबी, मारवाड़ी, सिंधी, गुजराती, नेपाली और गढ़वाली सहित अनेक भाषाई समाजों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनोहारी प्रस्तुतियां, पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल और साहित्यिक प्रदर्शनी शामिल रहे। अंत में डॉक्टर हेडगेवार स्मारक समिति के उपाध्यक्ष रुपेश पाल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।