इंदौर (न्यूज़ओ2) इंदौर के उषागंज क्षेत्र में संपत्ति कर बकाया के चलते सील की गई दुकानों को लेकर माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किराएदारों को भूमि-स्वामी के कर बकाया के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।
मामले में याचिकाकर्ता नरेश तिजारे एवं अन्य ने याचिका दायर कर बताया कि वे 13/1 एवं 14/1 उषागंज, छावनी स्थित दुकानों में किराएदार के रूप में व्यवसाय कर रहे हैं। नगर निगम द्वारा संपत्ति कर की वसूली के लिए उनकी दुकानों को सील कर दिया गया, जो विधि विरुद्ध है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने दलील दी कि संपत्ति कर का भुगतान करना भूमि-स्वामी की जिम्मेदारी है, जबकि दुकानों का संचालन किराएदारों द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में किराएदारों के प्रतिष्ठान को सील करना कानूनी रूप से उचित नहीं है।
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से यह तथ्य प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ताओं ने मार्च 2025 में एक उपक्रम (undertaking) दिया था, जिसमें उन्होंने किराया जमा करने का आश्वासन दिया था। इस पर याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय के समक्ष किराया जमा करने की सहमति व्यक्त की।
माननीय न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने आदेश में निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता उक्त उपक्रम के अनुसार बकाया किराया जमा करें और भविष्य में नियमित भुगतान करें। इसके बाद संबंधित दुकानों को तत्काल प्रभाव से डी-सील किया जाए।
न्यायालय ने इस निर्देश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- किराएदार को संपत्ति कर बकाया के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता
- निगम की कार्रवाई पर न्यायालय ने लगाई शर्तीय रोक
- किराया जमा करने पर दुकानों को तुरंत खोलने के आदेश
इस आदेश को किराएदारों के अधिकारों के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है।
