कृषि मंत्री चौहान की इंदौर में सोयाबीन पर राष्ट्रीय संवाद, वैज्ञानिकों और किसानों के साथ विस्तृत चर्चा

इंदौर, 26 जून। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान अनिवार्य हैं। इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय सोयाबीन संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने किसानों, वैज्ञानिकों, एफपीओ प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से संवाद किया और कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश का खाद्यान्न उत्पादन 44 प्रतिशत बढ़ा है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित बीजों और तकनीकों को अब सीधे खेतों तक पहुंचाने के लिए ‘लैब-टू-लैंड’ मॉडल अपनाया जा रहा है। इससे शोध कार्य किसान की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होंगे।

विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत 2,170 टीमों ने गांव-गांव जाकर 1.35 करोड़ किसानों से संपर्क किया। इस दौरान सामने आया कि कई क्षेत्रों में अमानक बीजों, कीटनाशकों और स्थिर उत्पादकता जैसी समस्याएं हैं। किसानों ने बताया कि सोयाबीन में लाल सड़न रोग और जीएम बीजों की अनुपलब्धता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इन समस्याओं पर रिसर्च की जाएगी और समाधान ढूंढे जाएंगे।

कृषि मंत्री चौहान ने बताया कि कृषि क्षेत्र में मैकेनाइजेशन बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि खेतों में मजदूरों की कमी होती जा रही है। साथ ही रोग प्रतिरोधक किस्मों के विकास, बीजों के उपचार और रोग की समय रहते पहचान पर भी काम किया जाएगा। जीनोम एडिटिंग तकनीक के जरिए बेहतर किस्में विकसित की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि सोयाबीन न केवल महत्वपूर्ण फसल है, बल्कि प्रोटीन का बड़ा स्रोत भी है। इसके वैल्यू एडीशन के माध्यम से जैसे टोफू, सोया मिल्क आदि उत्पाद बनाकर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। प्रगतिशील किसानों से सीखने की आवश्यकता है, जिन्होंने प्रति एकड़ 20 क्विंटल उत्पादन हासिल किया है।

कृषि मंत्री ने आगे जानकारी देते हुए कहा आगामी समय में कपास पर कोयंबटूर, गन्ने पर मेरठ और दलहन पर कानपुर में संवाद आयोजित किए जाएंगे। अंत में उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक कृषि-एक टीम’ के मंत्र के साथ सभी को मिलकर कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए काम करना होगा।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।