आदेश, स्वीकृति और फिर भी इंतज़ार
इंदौर, 31 जुलाई 2025। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को सातवां वेतनमान देने के मामले में देरी को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने आदेश और मंत्री की स्वीकृति के बावजूद वेतनमान का भुगतान न होने को गंभीरता से लेते हुए लोक संचालनालय आयुक्त को 12 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे तलब किया है।
मामला वर्ष 2019 का है, जब राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए 7वें वेतन आयोग के अनुसार वेतनमान लागू करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद उच्च शिक्षा मंत्री की औपचारिक स्वीकृति भी प्राप्त हुई, लेकिन इसके बावजूद शिक्षक अब तक बढ़े हुए वेतनमान से वंचित हैं।
जबलपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका में इस देरी को चुनौती दी गई, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट मंजूरी का बहाना अब स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने इस देरी को आदेश की अवहेलना मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायालय की टिप्पणी ने इस पूरे मसले को महज प्रशासनिक प्रक्रिया से उठाकर प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जवाबदेही के दायरे में ला दिया है। कोर्ट अब यह स्पष्ट करना चाहता है कि देरी किन कारणों से हो रही है—क्या यह फाइलों में अटकी प्रक्रिया है या फिर अफसरशाही की उपेक्षा?
अब सभी की निगाहें 12 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जब लोक संचालनालय आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा।
