इंदौर, 3 अगस्त 2025

मध्यप्रदेश की 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को न तो सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन मिल रहा है, न ही अन्य सुविधाएं। मध्यप्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक एम्प्लाईज़ फेडरेशन ने इसे गंभीर शोषण करार देते हुए सहकारिता विभाग को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते 11 सूत्रीय मांगों पर चर्चा नहीं की गई, तो बैंकिंग कार्य बाधित करने वाला आंदोलन शुरू किया जाएगा।

प्रमुख मुद्दे:

राज्य की लगभग आधी सहकारी समितियाँ घाटे में चल रही हैं, फिर भी कर्मचारियों से लगातार अधिक काम लिया जा रहा है।

IBPS के माध्यम से नियुक्त 1099 समिति सेवकों में से लगभग 20% ने वेतन विसंगतियों के चलते इस्तीफा दे दिया।

रजिस्ट्रार के सेवा नियमों और संविधान के अनुच्छेद 12 के अनुसार कर्मचारियों को समान व्यवहार मिलना चाहिए, पर सहकारिता विभाग इस निर्देश का पालन नहीं कर रहा।

वित्त विभाग के कई आदेश (जैसे चाइल्ड केयर लीव, विशेष महिला अवकाश, गृह भाड़ा भत्ता) सहकारिता विभाग द्वारा अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किए गए।

हाईकोर्ट जबलपुर के 9 मई 2024 के आदेश के बावजूद 2900 समिति सेवकों की नियुक्ति नहीं हुई।

वरिष्ठ कर्मचारियों को उच्च पदों का कार्य तो सौंपा गया, पर प्रमोशन नहीं दिया गया।

फेडरेशन की चेतावनी: फेडरेशन के महासचिव जी.आर. निमगांवकर ने कहा कि शासन जानबूझकर प्रमोशन प्रक्रिया को रोक रहा है और सीधी भर्ती की ओर बढ़ रहा है, जो कर्मचारियों में भारी असंतोष पैदा कर रहा है।

फेडरेशन ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार अनुरोध के बावजूद सहकारिता विभाग वार्ता के लिए समय नहीं दे रहा है। यदि ऐसा ही चलता रहा, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा, और बैंकिंग सेवाएं बाधित होने की पूरी जिम्मेदारी सहकारिता विभाग की होगी।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।