इंदौर में संपत्तिकर वृद्धि पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
7.30 लाख खातेदारों को राहत की उम्मीद, राज्य सरकार को सुनवाई कर निर्णय लेने के निर्देश
इंदौर, 25 अगस्त 2025।
इंदौर नगर निगम द्वारा शहर के लगभग 7.30 लाख खातेदारों पर किए गए 20 से 50 प्रतिशत तक संपत्तिकर वृद्धि पर अब राहत की उम्मीद जगी है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विभाग को याचिका पर सुनवाई कर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
यह आदेश कांग्रेस के पूर्व पार्षद दिलीप कौशल की याचिका पर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अभिभाषक विभोर खंडेलवाल और जयेश गुरनानी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि नगर निगम ने राज्य सरकार द्वारा 2020 में बनाए गए नए नियमों का पालन किए बिना अनुचित कर वृद्धि कर दी है।
क्या है मामला?
पूर्व पार्षद कौशल के अनुसार, शासन के नियमों के मुताबिक संपत्तिकर कलेक्टर द्वारा तय गाइडलाइन मूल्यांकन पर आधारित होना चाहिए। लेकिन नगर निगम ने न केवल पुराने करों में वृद्धि कर दी, बल्कि स्लैब भी कम कर दिए। इस वजह से नागरिकों पर 20% से 50% तक का अतिरिक्त बोझ पड़ गया।
उन्होंने बताया कि निगम द्वारा लागू किए गए समान रेट जोन से कई कॉलोनियां प्रभावित हुई हैं। उदाहरण के लिए—
रेट जोन-01 : अपोलो टावर एमजी रोड की गाइडलाइन 1.09 लाख रुपये (आवासीय) है, जबकि सांघी कॉलोनी और पलासिया मेन रोड की दरें इससे अधिक हैं, फिर भी सभी पर समान कर लगाया गया।
रेट जोन-03 : वेयरहाउस रोड की गाइडलाइन 35 हजार रुपये है, जबकि हाईलिंक गंगा विहार की सिर्फ 14 हजार रुपये, लेकिन दोनों पर एक जैसा कर।
इसी तरह अन्य रेट जोन में भी गाइडलाइन और कर निर्धारण में भारी अंतर सामने आया।
याचिकाकर्ता की दलील
अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने अदालत को बताया कि नगर निगम स्वयं सरकार के नियमों का पालन नहीं कर रहा और नागरिकों पर थोपे गए कर निगम अधिनियम और भारतीय संविधान के विरुद्ध हैं। इस पर न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने सहमति जताते हुए राज्य सरकार को आदेश दिए कि लंबित अभ्यावेदन पर सुनवाई कर जल्द निर्णय लें।
राहत की आस
अब इंदौर के लाखों संपत्तिकर खातेदारों को उम्मीद है कि सरकार सुनवाई के बाद नगर निगम की अनुचित कर वृद्धि को निरस्त कर राहत प्रदान करेगी।
