तकनीक आसान बनाती है क्लिक, लेकिन तस्वीर को यादगार बनाता है धैर्य और जुनून

इंदौर। “तकनीक ने फोटोग्राफी को आसान बना दिया है, लेकिन अविस्मरणीय तस्वीर के लिए ज़रूरी है बेहतर नज़र, धैर्य और जुनून।” – यह कहना था देश के वरिष्ठ पोलिटिकल फोटोग्राफर अनिल शर्मा का, जिन्होंने अपनी तीन दशक लंबी फोटो जर्नी को इंदौर में साझा किया।

स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. की वर्कशॉप में अनिल शर्मा ने बताया कि फोटो पत्रकारिता दरअसल पत्रकारिता ही है—“हम तस्वीर से वही करते हैं जो पत्रकार शब्दों से करते हैं।” उन्होंने स्वीकारा कि अखबारों में जगह कम होने और मोबाइल फोटोग्राफी बढ़ने से फोटोग्राफरों की चुनौती और बड़ी हो गई है। “आज जनप्रतिनिधि अपनी पर्सनल टीम से मोबाइल पर तस्वीरें खिंचवा लेते हैं, ऐसे में प्रोफेशनल फोटोग्राफर को भीड़ से अलग दिखने के लिए हटकर काम करना होगा।”

शर्मा ने कहा कि एक बेहतर क्लिक पागलपन की हद का जुनून मांगता है। कई बार वे एक तस्वीर के लिए घंटों भूखे-प्यासे इंतज़ार करते रहे। “अगर केवल नौकरी भर करनी है तो औसत तस्वीरें ही बनेंगी, लेकिन अगर लक्ष्य मुख्य पृष्ठ है, तो हर क्लिक पर दांव लगाना पड़ता है।”

वर्कशॉप में उन्होंने अपने कैमरे से कैद किए गए दुर्लभ क्षणों को स्लाइड शो के जरिए दिखाया—अटल बिहारी वाजपेयी की सहज मुस्कान से लेकर सोनिया गांधी के भावुक क्षण तक, राहुल गांधी, अमित शाह, मायावती, मुलायम सिंह यादव और लालू यादव जैसे नेताओं के अनदेखे चेहरे तक। हर तस्वीर के पीछे की कहानी सुनते हुए श्रोताओं को यह अहसास हुआ कि फोटोग्राफी केवल क्लिक नहीं, बल्कि इतिहास की धड़कनों को पकड़ने की कला है।

कार्यक्रम का स्वागत स्टेट प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने किया। आयोजन में संजय मालवीय, विवेक आर्य, पियूष खत्री, धीरज वर्मा एवं पंकज क्षीरसागर मौजूद रहे। संयोजन पुष्कर सोनी का था।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।