इंदौर जनसुनवाई में बुजुर्गों की पीड़ा:

इंदौर, 16 जून। इंदौर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े कई मामले सामने आए, जिनमें संपत्ति विवाद, पारिवारिक प्रताड़ना और भरण-पोषण से संबंधित शिकायतें प्रमुख रहीं। अधिकांश मामलों में बुजुर्गों ने अपने ही बेटे, बहू या पोते-पोतियों पर प्रताड़ना और संपत्ति पर कब्जा करने के आरोप लगाए।

बाणगंगा थाना क्षेत्र के सुंदर नगर निवासी रामप्यारी बाई प्रजापति ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि उनके छोटे बेटे संजय ने बजरंग पालिया स्थित उनकी कृषि भूमि धोखे से अपने नाम करा ली है और अब वह बुजुर्ग माता-पिता को परेशान कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से जमीन वापस दिलाने की मांग की।

मामले पर एसडीएम निधि वर्मा ने बताया कि आवेदन के अनुसार भूमि का हस्तांतरण दान पत्र के माध्यम से किया गया है। ऐसे में यदि भूमि वापस लेने की मांग है तो संबंधित आवेदन भूमि दान करने वाले व्यक्ति को करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण या प्रताड़ना की शिकायत करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार हस्तक्षेप कर सकता है।

इसी प्रकार जती कॉलोनी निवासी 80 वर्षीय शिवपति साहू ने शिकायत की कि उनके पोते और पोता बहू ने उनके साथ मारपीट की तथा उनके स्वामित्व वाले मकान के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें घर से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद उनकी देखभाल और उपचार उनकी बेटी द्वारा कराया गया। वृद्धा ने प्रशासन से मकान पर पुनः कब्जा दिलाने की मांग की।

जनसुनवाई में पहुंची सेवानिवृत्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पत्रलता जैन ने भी अपने बेटे पर प्रताड़ना और मकान पर कब्जा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जीवनभर की कमाई से बनाए गए घर पर उनका अधिकार सुनिश्चित किया जाए।

वहीं आजाद नगर थाना क्षेत्र से पहुंचीं सीताबाई परमार और उनकी बेटी पिंकी बोरासी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने मामले को पारिवारिक विवाद बताकर गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना था कि जब थाना स्तर पर सुनवाई नहीं होती, तभी पीड़ित न्याय की उम्मीद लेकर कलेक्टर जनसुनवाई तक पहुंचते हैं।

कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि जनसुनवाई में पुलिस संबंधी शिकायतों के साथ-साथ माता-पिता और बच्चों के बीच विवाद से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ऐसे मामलों में मध्यस्थता सेल के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच सुलह और समाधान का प्रयास करता है।

जनसुनवाई में सामने आए इन मामलों ने एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और उनके अधिकारों के संरक्षण को लेकर व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।