इंदौर। विजय नगर रोड क्रमांक-15 को 12 मीटर चौड़ा करने के प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण मामले में मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय स्थित भवन अनुज्ञा शाखा में सुनवाई आयोजित की गई। भवन अधिकारी विशाल राठौर ने प्रभावित नागरिकों की आपत्तियां एवं पक्ष सुना।

अधिवक्ता नेहा जैन ने बताया कि यह मामला केवल चार याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क से जुड़े अनेक संपत्ति स्वामियों के अधिकारों और हितों से संबंधित है। इसलिए क्षेत्र के सभी नागरिकों को मामले की वास्तविक स्थिति और प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी होना आवश्यक है।

सुनवाई में श्रीमती बाला रानी यादव, श्री विनोद पोरवाल, श्रीमती कुसुम चौहान एवं श्री मदनलाल कनारिया के प्रतिनिधियों प्रभावित संपत्ति स्वामियों की ओर से विस्तृत आपत्तियां प्रस्तुत की गईं। नागरिकों ने कहा कि उनकी संपत्तियां वैध स्वामित्व वाली भूमि पर निर्मित हैं तथा किसी भी प्रकार का शासकीय भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया गया है।

उन्होंने यह भी आपत्ति दर्ज कराई कि नोटिस में सड़क की चौड़ाई 12 मीटर बताई गई है, जबकि विजय नगर गली क्रमांक-15 के हिस्से में सड़क की वास्तविक चौड़ाई लगभग 9.14 मीटर (30 फीट) है।

याचिकाकर्ताओं ने नगर निगम से सड़क चौड़ीकरण के आधार, स्वीकृत नक्शे, सीमांकन एवं सर्वे रिपोर्ट, कॉलोनी ले-आउट, मूल सड़क चौड़ाई से संबंधित अभिलेख तथा संबंधित स्वीकृति आदेशों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही स्पष्ट मापन और अभिलेखीय परीक्षण से पहले किसी भी प्रकार की प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया।

अधिवक्ता नेहा जैन के अनुसार, जब तक संबंधित अभिलेखों का परीक्षण और विधिवत सीमांकन नहीं हो जाता, तब तक किसी भी संपत्ति को अतिक्रमण मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत आपत्तियों को अभिलेख पर लिया गया और अब नगर निगम द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों एवं सुनवाई में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हाईकोर्ट अधिवक्ता नंदलाल तिवारी ने बताया कि यह सुनवाई माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में आयोजित की गई। न्यायालय ने संबंधित पक्षों को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में नगर निगम मुख्यालय स्थित भवन अनुज्ञा शाखा में भवन अधिकारी विशाल राठौर ने याचिकाकर्ताओं एवं अन्य प्रभावित नागरिकों का पक्ष सुना तथा उनकी आपत्तियां एवं दस्तावेज अभिलेख पर लिए। मामले में आगे की कार्रवाई अब सुनवाई में प्रस्तुत तथ्यों, उपलब्ध अभिलेखों एवं न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।