इंदौर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ ने ओमप्रकाश जोशी एवं अन्य बनाम राज्य शासन एवं अन्य मामले में आदेश पारित करते हुए हुकुमचंद मिल प्रांगण को “सिटी फॉरेस्ट” घोषित करने संबंधी याचिका को निरस्त कर दिया।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हुकुमचंद मिल की भूमि वर्ष 1992 से बंद मिल की है। इस भूमि का अधिग्रहण मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड द्वारा 421 करोड़ रुपये की राशि अदा कर किया गया था। उक्त राशि से मिल मजदूरों एवं अन्य बकाया का भुगतान किया जा चुका है। उस समय याचिकाकर्ताओं द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी।

अदालत ने कहा कि अब इतनी बड़ी राशि चुकाने के बाद हाउसिंग बोर्ड के विकास के अधिकार को छीना नहीं जा सकता। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वन अधिनियम में “सिटी फॉरेस्ट” जैसी कोई संज्ञा नहीं है। राज्य शासन द्वारा इंदौर के कनाडिया क्षेत्र में एक लाख पौधे लगाकर सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जा रहा है।

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि हाउसिंग बोर्ड द्वारा जारी ई-निविदा केवल झाड़ियों और झाड़-झंखाड़ हटाने के लिए है। इसमें पेड़ काटने का कोई उल्लेख नहीं है।

इस प्रकरण में शासन की ओर से पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने रखा। न्यायालय के आदेश के बाद हुकुमचंद मिल प्रांगण के विकास का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।