इंदौर, 07 जनवरी 2026 : देश की सबसे स्वच्छ नगरी कहे जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित जल से 17 से अधिक मौतों और हजार से ज्यादा नागरिकों के बीमार होने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है। इसी क्रम में 7 जनवरी को मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इंदौर के विभिन्न इलाकों में पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय नागरिकों से संवाद किया और पेयजल का TDS परीक्षण भी किया, जो मानकों पर खरा नहीं पाया गया।
वार्ड 30 में बिगड़े हालात
नेता प्रतिपक्ष का दौरा विधानसभा क्षेत्र–2 के वार्ड 30 में भी हुआ। यह क्षेत्र हाल ही में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से गुज़रा है। सड़क चौड़ीकरण के चलते घर–दुकान तोड़े गए, लेकिन इसके बाद हालात और बिगड़ गए। स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि खुदाई के दौरान पाइपलाइन फूट गई, जिससे ड्रेनेज का गंदा पानी नर्मदा की पाइपलाइन में मिल रहा है और वही पानी घरों तक पहुंच रहा है। कच्ची सड़कें, बिखरे पत्थर और लगातार खुदाई से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। बच्चों के गिरने और लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
“अच्छा लगा, लेकिन उम्मीद नहीं”
स्थानीय महिला बिंदिया ने कहा, “नेता जी आए, हालचाल जाना, अच्छा लगा… लेकिन क्या कर पाएंगे? कोई भी सरकार आ जाए, कुछ नहीं होता। पाइपलाइन फूट गई है, चैंबर का पानी नर्मदा में मिल रहा है। घर तोड़ दिए, हर्जाना भी नहीं मिला। पट्टे की सूची देने को कहा गया है, लेकिन हमें भरोसा नहीं कि कुछ बदलेगा।”
बुजुर्ग महिला नर्वदा ने बताया कि गंदे पानी से जीना मुश्किल हो गया है। “न पीने का साफ पानी है, न नहाने-धोने का। दूषित पानी से चर्म रोग हो गया है।”
अनीता का कहना है कि बदबूदार पानी के कारण बाजार से पानी की कैन खरीदनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
अन्य महिलाओं ने कहा, “हम मजदूरी करने वाले लोग हैं। गरीब हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमें बुनियादी सुविधाएं भी न मिलें।”
“संवेदनाएं दिखीं, समाधान नहीं”
कई रहवासियों ने साफ कहा कि नेता प्रतिपक्ष का आना अच्छा लगा, लेकिन उन्हें किसी भी सरकार से अब खास उम्मीद नहीं बची है। “कोई भी सरकार आ जाए, हमारे हालात बदलने की उम्मीद कम है,” — यह बात कई महिलाओं ने दोहराई।
सत्तापक्ष का पलटवार
वहीं वार्ड 30 पार्षद पति (कालू गागोरे) ने इस दौरे का विरोध किया। उनका कहना था कि विपक्ष का काम ही हर बात को मुद्दा बनाना है। उन्होंने कहा कि नर्मदा और ड्रेनेज की नई लाइन डाली जा रही है, विकास कार्य चल रहा है, इसलिए कुछ समय के लिए परेशानी स्वाभाविक है। गंदे पानी की शिकायतों पर उनका जवाब था—“शिकायत करने वाले कांग्रेस के घर हैं।”
भागीरथपुरा के हालात यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि स्वच्छता के राष्ट्रीय पुरस्कारों से सजी इंदौर में ज़मीनी हकीकत इतनी भयावह क्यों है?
सवाल बरकरार
रहवासी पूछ रहे हैं—“अगर सरकारें बदलने से भी हालात नहीं बदलते, तो आखिर उम्मीद किससे की जाए?”
