15 राज्यों में जनजागरूकता कार्यक्रम, 7 अप्रैल को सरकार को सौंपा जाएगा ज्ञापन

भोपाल/रायपुर, 1 अप्रैल 2026:

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (जेएसएआई) ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में 1 से 7 अप्रैल तक व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य मुद्दों पर सात दिवसीय राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की है। अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों, श्रमिकों और नीति-निर्माताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नीति-स्तर पर हस्तक्षेप की मांग को मजबूत करना है।


देशभर में कार्यक्रम और गतिविधियां
अभियान देश के करीब 15 राज्यों में संचालित होगा, जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बैठकें, सेमिनार और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे। साथ ही एक राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है, जिसे 7 अप्रैल को सरकार को सौंपा जाएगा। इसी दिन राष्ट्रीय स्तर पर वेबिनार का आयोजन भी प्रस्तावित है।


छत्तीसगढ़ से अभियान की शुरुआत
अभियान की शुरुआत छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के ग्राम पिपरहा में सामुदायिक जनसभा के साथ हुई, जिसमें चार गांवों के ग्रामीणों ने भाग लिया। राज्य स्तरीय वेबिनार में विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों की सहभागिता रही।
खतरनाक अपशिष्ट पर चिंता
राज्य समन्वयक समूह के सदस्य सरवत हुसैन नकवी ने बताया कि राज्य में सीमेंट, इस्पात, उर्वरक, एल्यूमीनियम और पावर प्लांट जैसी इकाइयों से खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न हो रहा है, जिसमें उपयोग किया हुआ तेल, स्लज, धात्विक अवशेष और रासायनिक कचरा शामिल हैं। चंद्रकांत यादव ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में 83,682 और छत्तीसगढ़ में 540 इकाइयाँ खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न कर रही हैं।


स्वास्थ्य समस्याओं पर फोकस
कार्यक्रम में पर्यावरणीय प्रभावों के साथ कुपोषण, एनीमिया और कुष्ठ जैसे स्वास्थ्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि देश की लगभग 60% आबादी एनीमिया से प्रभावित है, जबकि राज्य में हर तीसरा बच्चा कुपोषित है।


सरकार से मांगें
आदिवासी महिला नेता शिमला मेरावी ने सरकार से मांग की कि व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा मजदूरों के लिए स्वास्थ्य अधिकार कानून लागू किया जाए।


विभिन्न वर्गों की भागीदारी
जनसभा में सिविल सोसायटी संगठनों, पंचायत प्रतिनिधियों, शासकीय विभागों के प्रतिनिधियों और आदिवासी समुदाय के लोगों की भागीदारी रही।